रांची पुलिस न्यूज: झारखंड पुलिस एसोसिएशन से 10.5 करोड़ का हिसाब मांगा गया

रांची में पुलिस एसोसिएशन के 10.5 करोड़ रुपये के खर्च की स्टेट ऑडिट जांच की मांग करते वर्दीधारी पुलिसकर्मी।

रांची में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने झारखंड पुलिस एसोसिएशन द्वारा पिछले 25 वर्षों में एकत्रित किए गए 10.5 करोड़ रुपये के खर्च की स्टेट ऑडिट टीम से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। 29 मई, 2026 को पुलिसकर्मियों ने वेतन से कटने वाले 50 रुपये के चंदे की राशि में पारदर्शिता की मांग उठाई।

रांची में पुलिसकर्मियों ने एसोसिएशन के खर्चों पर उठाए सवाल

झारखंड पुलिस एसोसिएशन को पिछले 25 वर्षों में चंदे के रूप में कुल दस करोड़ पचास लाख (10.5 करोड़) रुपये प्राप्त हुए हैं। अब इस बड़ी राशि के उपयोग और खर्च को लेकर खुद संगठन के सदस्यों और वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिसकर्मियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच स्टेट ऑडिट टीम से कराने की पुरजोर मांग की है।

प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों का कहना है कि हर महीने उनके सैलरी अकाउंट (वेतन खाते) से संगठन के नाम पर पचास (50) रुपये की कटौती की जाती है। इस कटौती के बावजूद, यह राशि कहां और किस प्रकार खर्च की जा रही है, इसका कोई भी पारदर्शी रिकॉर्ड या जानकारी सदस्यों के साथ साझा नहीं की जाती है।

वित्तीय अनियमितता और बुनियादी सुविधाओं की कमी के आरोप

वर्दीधारियों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि इतनी बड़ी रकम का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब सामने नहीं आ रहा है। पुलिसकर्मियों का आरोप है कि राज्य के पुलिस जवानों के कल्याण और विकास के नाम पर जुटाई गई इस राशि का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल कागजी दावों और फिजूलखर्ची की भेंट चढ़ गया है।

जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए सदस्यों ने कहा कि दो दशकों से अधिक समय तक करोड़ों रुपये का फंड इकट्ठा होने के बावजूद, झारखंड के बुनियादी पुलिसकर्मियों को आज भी कई बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हो रही हैं। उनका मानना है कि संगठन की ईमानदारी बनाए रखने के लिए इस खर्च की पूरी जानकारी बहुत पहले ही सार्वजनिक की जानी चाहिए थी।

ऑडिट की मांग पर एसोसिएशन नेतृत्व का रुख

पुलिसकर्मियों के बीच बढ़ते असंतोष और वित्तीय आरोपों पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (वरिष्ठ उपाध्यक्ष) महताब खान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। खान ने स्पष्ट किया कि यदि संगठन के सामान्य सदस्य इस मामले में जांच की मांग कर रहे हैं, तो पूरे खर्चों की प्रामाणिकता की जांच कराई जा सकती है।

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