झारखंड की राजधानी रांची और इसके आसपास के इलाकों में पेट्रोल-डीजल का संकट गहरा गया है। आपूर्ति बाधित होने से कई पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राई हो गए हैं, जिसके कारण गुरुवार को ईंधन केंद्रों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। स्थिति को देखते हुए पिपरवार क्षेत्र में ईंधन की राशनिंग भी शुरू कर दी गई है।
तेल कंपनियों के दावों के बीच कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म
राजधानी रांची समेत इसके आसपास के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पेट्रोल-डीजल का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। हालांकि तेल कंपनियों द्वारा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। कई प्रमुख पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो गया है, जिससे स्थानीय वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बूटी मोड़ स्थित न्यू गुमला ट्रेडर्स और हाजी चौक के सौम्या फ्यूल्स में बुधवार को पेट्रोल और डीजल का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो गया था। हालांकि, बाद में न्यू गुमला ट्रेडर्स में शाम तक आपूर्ति को बहाल कर दिया गया। इसके अलावा रिंग रोड के सीठियो स्थित जगरानी फ्यूल्स और गोंदलीपोखर के कई पंपों में भी डीजल की भारी कमी देखी गई है।
टाटीसिलवे, सिल्ली और मुरी के पंपों पर उमड़ी पैनिक बाइंग
जोन्हा और गोंदलीपोखर जैसे क्षेत्रों में तेल की किल्लत होने के बाद इसका सीधा असर टाटीसिलवे के पेट्रोल पंपों पर देखने को मिला। यहां अचानक से उपभोक्ताओं की भीड़ बढ़ गई और लोग घंटों लंबी लाइनों में लगकर अपनी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल भराने को मजबूर दिखे।
उधर, सिल्ली और मुरी इलाकों में भी ईंधन की कमी की खबर फैलते ही आम जनता के बीच पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) शुरू हो गई। लोग बड़ी संख्या में गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए पंपों पर पहुंचने लगे, जिससे व्यवस्था को संभालने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पिपरवार क्षेत्र में ईंधन की राशनिंग और सख्त पाबंदियां लागू
बढ़ते संकट को देखते हुए पिपरवार क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी गई है। इसके तहत अब प्रति वाहन तेल देने की एक सीमा तय कर दी गई है। नई व्यवस्था के अनुसार:
- बाइक चालकों को एक बार में अधिकतम ₹200 का पेट्रोल दिया जा रहा है।
- बड़े और चार पहिया वाहनों के लिए तेल की सीमा अधिकतम ₹2000 तय की गई है।
- किसी भी व्यक्ति को गैलन, जरकिन या अन्य खुले बर्तनों में तेल देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
क्षेत्र के कई पेट्रोल पंपों के बाहर “डीजल-पेट्रोल उपलब्ध नहीं है” के सूचना बोर्ड भी टांग दिए गए हैं।
सीसीएल क्षेत्र में कोयला ढुलाई और परिवहन कार्य बाधित
इस डीजल संकट का सीधा असर अब झारखंड के आर्थिक और औद्योगिक ढांचे पर भी पड़ने लगा है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) क्षेत्र में कोयला ढुलाई का काम प्रभावित हो रहा है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों को गाड़ियों के लिए पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण खदानों से कोयले का परिवहन कार्य पूरी तरह बाधित हो गया है।
आपूर्ति में आ रही इस रुकावट के चलते आम नागरिकों के साथ-साथ परिवहन और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों में चिंता काफी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि तेल कंपनियों द्वारा जल्द ही आपूर्ति को सामान्य नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी भयावह रूप ले सकता है।
