नई दिल्ली में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एंटी-कैंसर दवाओं के व्यापार मार्जिन को सीमित करने में वर्षों की देरी पर सरकार से सवाल किया और एक ऐसे मामले को उजागर किया जहां 11,000 रुपये में मिलने वाला इंजेक्शन निजी अस्पताल द्वारा 1.3 लाख रुपये में बेचा गया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों और देरी पर उठाए सवाल
नई दिल्ली में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि सरकार को एंटी-कैंसर दवाओं पर व्यापार मार्जिन को सीमित करने में वर्षों का समय क्यों लगा, और दवा मूल्य निर्धारण नीतियों की मानवीय लागत पर गंभीर दुख जताया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ देश में दवा मूल्य निर्धारण और कॉर्पोरेट मुनाफाखोरी के मुद्दों से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं।
अदालत ने एक कैंसर मरीज के मामले का जिक्र किया, जिसके पति, जो कि एक दवा वितरक थे, को निजी अस्पताल द्वारा कथित तौर पर 1.3 लाख रुपये में एक कीमोथेरेपी इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वे खुद उसी दवा को 11,000 रुपये में प्राप्त कर सकते थे। यह देखते हुए कि “यह लोगों का जीवन है, वाणिज्य नहीं,” पीठ ने पूछा कि जब सरकार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में अत्यधिक मुनाफाखोरी पर चुप रही, तो कितने मरीजों ने कष्ट झेला होगा या अपनी जान गंवाई होगी।
लाभ मार्जिन और एनपीपीए की कार्रवाई की जांच
सुनवाई के दौरान पीठ ने लाभ मार्जिन पर सवाल उठाया और 400 प्रतिशत मूल्य अंतर का औचित्य पूछा। अदालत ने टिप्पणी की कि नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) का निर्णय इस अदालत के हस्तक्षेप के बाद सामने आया प्रतीत होता है और यह पूरी तरह से निष्क्रिय नजर आती है।
यद्यपि रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने स्टॉकिस्ट या अस्पताल को शुरुआती बिंदु पर दवा की लागत के मुकाबले 137 कैंसर दवाओं के व्यापार मार्जिन पर 30 प्रतिशत की मूल्य सीमा की घोषणा की है, फिर भी पीठ ने गहरी चिंता व्यक्त की। न्यायमूर्ति मेहता ने सवाल किया कि क्या जनता इस भ्रम में जी रही है कि उन्हें कभी डीपीको (ड्रग्स प्राइसेस कंट्रोल आर्डर) का लाभ मिलेगा, और पूछा कि डीपीको मार्जिन सीमाओं को सभी दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर सार्वभौमिक रूप से क्यों नहीं लागू किया जाता है।
