आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम के 75 वर्षीय एथलीट बूरा श्यामसुंदर राव ने 256 मेडल जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सुनने की समस्या के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की और लगातार अपनी पहचान बनाई।
श्रीकाकुलम के 75 वर्षीय एथलीट की बड़ी उपलब्धि
श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश): 75 वर्षीय बूरा श्यामसुंदर राव ने अपनी खेल उपलब्धियों से यह साबित कर दिया है कि उम्र और शारीरिक सीमाएं सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनतीं। 256 मेडल जीतकर उन्होंने न केवल श्रीकाकुलम बल्कि पूरे राज्य में अपनी पहचान बनाई है।
बचपन की चुनौतियों के बावजूद नहीं मानी हार
जन्म से ही सुनने में कठिनाई का सामना करने वाले श्यामसुंदर राव को बचपन में कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “मेरी सुनने की क्षमता भले कमजोर हो, लेकिन मैं अपने कामयाबी की आवाज बुलंद करना चाहता था।”
उनकी खेल यात्रा वर्ष 1978 में शुरू हुई, जब उनके शारीरिक शिक्षा शिक्षक ने उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बास्केटबॉल से एथलेटिक्स तक का सफर
शुरुआत में उन्होंने एनटीआर म्यूनिसिपल स्टेडियम में बास्केटबॉल का प्रशिक्षण लिया और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते। लेकिन टीम के साथ तालमेल और संवाद में कठिनाई के कारण उन्होंने एथलेटिक्स को चुना।
उन्होंने कहा, “खेल ने मुझे वह आवाज दी, जब दुनिया मेरे आसपास खामोश थी।”
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता
100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने जर्मनी, अमेरिका, न्यूजीलैंड और मलेशिया जैसे देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
इन प्रतियोगिताओं में उन्होंने कई स्वर्ण और कांस्य पदक जीते। वेटरन श्रेणी में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां उन्होंने 100 मीटर दौड़ 10.9 सेकंड में और 200 मीटर 22.2 सेकंड में पूरी की।
लगातार जारी है जीत का सिलसिला
हाल के वर्षों में उन्होंने मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतने के साथ देशभर में कई प्रतियोगिताओं में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
उन्होंने कहा, “अगर जुनून जिंदा है, तो उम्र सिर्फ एक संख्या है।”
युवाओं के लिए प्रेरणा
अपनी उपलब्धियों के बावजूद उनके भीतर और मेडल जीतने की इच्छा बनी हुई है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा, “अगर मैं 75 साल की उम्र में दौड़ सकता हूं, तो युवाओं को अपने सपनों के पीछे दौड़ने से क्या रोक सकता है?”
उन्होंने अंत में कहा कि अगर उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती हैं, तो उनका प्रयास सफल होगा।
