श्रीलंका जेल से रिहा होकर चेन्नई लौटे तमिलनाडु के 16 मछुआरे

श्रीलंका जेल से रिहा होने के बाद चेन्नई हवाई अड्डे पर पहुंचे तमिलनाडु के 16 मछुआरे।

श्रीलंका की जेल में बंद तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के 16 मछुआरे रिहा होने के बाद शनिवार को कोलंबो से इंडिगो की उड़ान द्वारा चेन्नई हवाई अड्डे पहुंचे। भारतीय दूतावास के अधिकारियों और तमिलनाडु मत्स्य विभाग के प्रयासों से इन मछुआरों की स्वदेश वापसी संभव हो सकी।

श्रीलंका जेल से रिहा होकर चेन्नई पहुंचे 16 मछुआरे

श्रीलंका की जेल में बंद तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के 16 मछुआरे रिहा होने के बाद इंडिगो की फ्लाइट से चेन्नई लौट आए हैं। चेन्नई हवाई अड्डे पर पहुंचे इन मछुआरों का स्वागत तमिलनाडु मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने किया। विभाग द्वारा इन सभी मछुआरों को उनके गृह नगर रामेश्वरम भेजने के लिए आवश्यक परिवहन व्यवस्था की गई है।

समुद्री सीमा पार करने के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

यह मामला दो अलग-अलग घटनाओं से जुड़ा है। 5 अगस्त को रामनाथपुरम जिले के रामेश्वरम से 11 मछुआरे एक यंत्रीकृत नाव से समुद्र में मछली पकड़ने गए थे, जिन्हें श्रीलंकाई नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पार करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। इसके एक हफ्ते बाद 12 अगस्त को श्रीलंकाई नौसेना ने रामेश्वरम के ही 9 अन्य मछुआरों को इसी आरोप में गिरफ्तार किया था। सभी 20 मछुआरों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया था।

जुर्माना भरने के बाद हुई 16 मछुआरों की रिहाई

श्रीलंका की अदालत ने प्रत्येक मछुआरे पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया था और राशि का भुगतान करने पर रिहाई का आदेश दिया था। पहले समूह के सभी 11 मछुआरों ने जुर्माना भरकर रिहाई प्राप्त की। हालांकि, दूसरे समूह के 9 मछुआरों में से केवल 5 लोग ही जुर्माना राशि चुका सके, जिससे उन्हें रिहा कर दिया गया। जुर्माना न भर पाने के कारण शेष 4 मछुआरे अभी भी श्रीलंका की जेल में बंद हैं।

कूटनीतिक प्रयासों से हुई स्वदेश वापसी

श्रीलंका सरकार ने रिहा किए गए 16 मछुआरों को भारतीय दूतावास के अधिकारियों को सौंप दिया। भारतीय अधिकारियों ने उन्हें शिविर में ठहराया और आपातकालीन यात्रा दस्तावेज (इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स) जारी कर कोलंबो से इंडिगो उड़ान के माध्यम से चेन्नई भेजा। हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की थी।

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