UPI नियम बदलाव: ₹2,000 से अधिक मर्चेंट भुगतान पर लगेगा 0.4% शुल्क

स्मार्टफोन और क्यूआर कोड के माध्यम से यूपीआई डिजिटल भुगतान करते मर्चेंट और ग्राहक

वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को Unified Payments Interface (UPI) पर ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की घोषणा की है। यह शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होगा, जबकि आम UPI उपयोगकर्ताओं और ₹2,000 तक के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

UPI भुगतान पर बड़ा फैसला: ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लगेगा 0.4% MDR शुल्क

नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने और भुगतान पारितंत्र (Payment Ecosystem) को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्रालय ने Unified Payments Interface (UPI) लेनदेन से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक मूल्य के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाएगा।

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क केवल मर्चेंट (व्यापारियों) पर लागू होगा और आम नागरिकों व उपभोक्ताओं के लिए UPI लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क बना रहेगा। इसके अलावा, ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतानों और RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतानों पर भी बैंक या सिस्टम प्रदाता कोई शुल्क नहीं ले सकेंगे।

विभिन्न क्षेत्रों के लिए तय दरें

मंत्रालय द्वारा जारी की गई नई दरों के अनुसार:

  • सामान्य मर्चेंट लेनदेन: ₹2,000 से अधिक के P2M भुगतानों पर 0.4% MDR लगेगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन तक सीमित (Capped) रहेगा।
  • आवश्यक और कम-मार्जिन वाले क्षेत्र: रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर प्रति ट्रांजेक्शन ₹5 का निश्चित शुल्क लागू होगा।
  • म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज: म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर्स और डीलरों से जुड़े भुगतानों पर 0.02% शुल्क लगेगा, जो अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा।

किसे मिलेगा शुल्क का हिस्सा?

एकत्रित किया जाने वाला MDR शुल्क भुगतान पारितंत्र के प्रतिभागियों के बीच साझा किया जाएगा। इसमें लेनदेन को प्रोसेस करने वाले बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (PSP) और UPI एप्लिकेशन प्रदाता शामिल होंगे।

सरकार के इस कदम से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और वित्तीय संस्थानों को सहायता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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