देहरादून में नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून: 245 मदरसे बंद, 33 पंजीकृत

देहरादून में नई अल्पसंख्यक शिक्षा प्रणाली के तहत बंद पड़े मदरसे का दृश्य

देहरादून में 8 अक्टूबर 2026 को मदरसा बोर्ड के विघटन के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। उत्तराखंड में नई अल्पसंख्यक शिक्षा प्रणाली लागू होने के महज तीन महीनों के भीतर कुल 452 पंजीकृत मदरसों में से 245 मदरसे बंद हो चुके हैं, जिससे छात्रों और कर्मचारियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

उत्तराखंड में 245 मदरसों के संचालन पर लगा ताला

देहरादून में मदरसा बोर्ड के विघटन के बाद सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नई प्रणाली लागू होने से पहले राज्य में कुल 452 पंजीकृत मदरसे संचालित थे। पिछले तीन महीनों के दौरान इनमें से 245 मदरसों का संचालन पूरी तरह बंद हो गया है।

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन इस वर्ष 3 फरवरी को किया गया था। इस प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य पूरे ढांचे को व्यवस्थित कर एक नई प्रणाली स्थापित करना था। हालांकि, पिछले तीन महीनों की रिपोर्ट में 245 मदरसों के बंद होने की बात सामने आई है।

स्वेच्छा से बंद हुए 227 मदरसे, 17 पर चला सीलिंग का चाबुक

बंद हुए 245 मदरसों में से 227 संस्थानों के संचालकों ने स्वेच्छा से ताले लगाने का फैसला किया। इसके अलावा, नियमों का पालन न करने के कारण जिला प्रशासन द्वारा 17 मदरसों को सील कर दिया गया। वहीं, 1 मदरसा 30 सितंबर की निर्धारित समय सीमा तक पंजीकरण आवेदन जमा करने में पूरी तरह विफल रहा।

वर्तमान में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत 33 मदरसों और 2 अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। इस प्रकार पिछले तीन महीनों में कुल 35 अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता और पंजीकरण मिला है।

छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता और शिक्षा विभाग पर सवाल

बंद हुए मदरसों में पढ़ रहे बच्चों की वर्तमान स्थिति और वहां कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य को लेकर शासन के पास फिलहाल कोई ठोस डेटा मौजूद नहीं है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में जानकारी जुटाने और स्थिति को ट्रैक करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, शिक्षा विभाग में पंजीकरण के लिए लगभग 170 मदरसों ने आवेदन किया था, लेकिन विभागीय देरी के कारण अधिकांश का पंजीकरण अब तक अटका हुआ है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि शिक्षा विभाग द्वारा पंजीकृत किए गए 2 मदरसों को मानकों पर खरा न उतरने के कारण बाद में सील करना पड़ा, जिससे विभाग की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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