मानसून के बाद उत्तराखंड में 15 सितंबर से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के दूसरे चरण को सुगम बनाने के लिए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 14 सितंबर को सड़क, स्वास्थ्य, सुरक्षा और हेलीकॉप्टर सेवाओं की समीक्षा बैठक करेंगे। इस वर्ष अब तक 50 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
उत्तराखंड चारधाम यात्रा का दूसरा चरण 15 सितंबर से शुरू, सरकार की प्राथमिकता सुगम और सुरक्षित दर्शन
उत्तराखंड में मानसून का सीजन समाप्त होते ही चारधाम यात्रा के दूसरे चरण की तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गई हैं। राज्य सरकार की प्राथमिक चुनौती तीर्थयात्रियों के लिए सड़क और हवाई दोनों मार्गों से यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाना है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी 14 सितंबर को लेंगे समीक्षा बैठक
दूसरे चरण की शुरुआत से ठीक पहले उत्तराखंड सरकार तैयारियों का अंतिम जायजा लेने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 14 सितंबर को यात्रा से जुड़े सभी प्रमुख विभागों और अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे।
इस बैठक में सड़कों की स्थिति, हेलीकॉप्टर सेवाओं, यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
केदारनाथ के लिए 15 सितंबर से फिर शुरू होंगी हेलीकॉप्टर सेवाएं
चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में केदारनाथ धाम के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मानसून के दौरान स्थगित की गई हेलीकॉप्टर सेवाओं को 15 सितंबर से पुनः बहाल कर दिया जाएगा।
हवाई सेवा शुरू होने से सड़क मार्ग के अलावा हेलीकॉप्टर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
सुरक्षा मानकों और मौसम निगरानी के निर्देश
संबंधित विभागों को हेलीपैड प्रबंधन, उड़ानों के संचालन, मौसम की निगरानी और सुरक्षा मानकों से जुड़ी सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
केदारनाथ पहुंचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेलीकॉप्टर सेवा पर निर्भर रहते हैं। पहाड़ी क्षेत्र के चुनौतीपूर्ण इलाके, अचानक बदलते मौसम और कम दृश्यता जैसी बाधाओं से निपटने के लिए यह सतर्कता बेहद जरूरी है।
अब तक 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल चारधाम यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 50 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। अकेले केदारनाथ धाम में अब तक 14,93,161 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
मानसून घटने के साथ ही सरकार और प्रशासन के सामने यात्रा मार्गों को सुरक्षित करने और बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने की दोहरी चुनौती है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यात्रा समापन तक श्रद्धालुओं का कुल आंकड़ा लगभग 60 लाख तक पहुंच जाएगा।
