बृजभूषण की बरीयत के खिलाफ महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई 28 सितंबर को

राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई से पहले भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह।

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ चार महिला पहलवानों की याचिका पर दिल्ली की राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट 28 सितंबर को सुनवाई करेगी। शनिवार को विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अनुपलब्धता के कारण मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी गई।

नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोपों से बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अब 28 सितंबर को सुनवाई होगी।

विशेष न्यायाधीश की अनुपलब्धता से टली सुनवाई यह मामला शनिवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अनुपलब्धता के कारण कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सोमवार (28 सितंबर) की तारीख तय की है। चार महिला पहलवानों ने अदालत का रुख कर बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

3 अगस्त के निचली अदालत के आदेश को चुनौती महिला पहलवानों ने मैजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा 3 अगस्त को दिए गए उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि निचली अदालत का फैसला कानूनन टिकाऊ नहीं है, साक्ष्यों का गलत व चुनिंदा मूल्यांकन किया गया है और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई है। इसके अलावा, विनोद तोमर के खिलाफ धारा 506 (I) के तहत आपराधिक धमकी के आरोप से बरी किए जाने को भी चुनौती दी गई है।

निचली अदालत ने क्या दिया था तर्क? निचली अदालत ने दोनों आरोपियों को यह कहते हुए बरी किया था कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे आरोपों को साबित करने में विफल रहा। अदालत ने अपने फैसले में पहलवानों की ओर से घटना के लंबे समय बाद तक चुप्पी साधे रखने और आरोपी के साथ सामान्य संबंध बनाए रखने का भी उल्लेख किया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 354, 354D, 354A और 506(1) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

बचाव पक्ष की दलीलें मामले की सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के वकील राजीव मोहन ने तर्क दिया कि सिंह 7 सितंबर 2022 को भारत में मौजूद नहीं थे, जिस दिन की एक घटना का उल्लेख मामले में किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजी थी। वकील ने अदालत को बताया कि पहलवानों का पहला विरोध प्रदर्शन 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर हुआ था, जबकि अगले दिन एक पहलवान ने सरकार से मिलकर अपना पक्ष रखा था।

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