रांची स्थित झारखंड उच्च न्यायालय में प्रस्तुत राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद एक बांग्लादेशी महिला से कथित दुष्कर्म के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अदालत ने पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पीड़िता के प्रत्यर्पण में देरी पर केंद्र से जवाब मांगा है।
हजारीबाग डिटेंशन सेंटर मामला: उच्च न्यायालय में सुनवाई
झारखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार द्वारा सौंपे गए ब्योरे के बाद हजारीबाग डिटेंशन सेंटर का यह मामला प्रकाश में आया। जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (DALSA), हजारीबाग द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने पीड़िता की सुरक्षा और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
तीन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर और निलंबन
राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म के आरोप में हजारीबाग के तीन कांस्टेबलों—रणजीत महतो, रेणु बेंजामिन और वारिस कच्छप के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इन तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उच्च न्यायालय ने एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ लगाई गई कानूनी धाराओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
सजा पूरी होने के बाद भी हिरासत में रखने का मामला
गैर-सरकारी संगठन (NGO) की ओर से उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अंकित अपूर्व ने यह मामला उठाया। अधिवक्ता के अनुसार, महिला वर्ष 2021 में अपनी पूरी सजा काट चुकी थी, इसके बावजूद उसे डिटेंशन सेंटर और जेल के बीच रखा जाता रहा। झालसा (JHALSA) सचिव के निर्देश पर डालसा टीम ने महिला का बयान दर्ज किया, जिसमें महिला ने तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया।
केंद्र सरकार से मांगा गया जवाब
अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि सजा पूरी होने के बाद भी पीड़िता को अब तक बांग्लादेश वापस क्यों नहीं भेजा गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
