पलामू टाइगर रिजर्व में प्रस्तावित झारखंड के पहले टाइगर सफारी और उससे जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस उद्देश्य से पलामू टाइगर प्रोजेक्ट, उत्तर डिवीजन, मेदिनीनगर द्वारा आर्किटेक्चरल कंसल्टेंसी सर्विसेज के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिछले वर्ष अक्टूबर माह में टाइगर सफारी परियोजना के विस्तृत प्रोजेक्शन को देखकर इसे स्वीकृति प्रदान की थी।
एक वर्ष में तैयार होगा मास्टर प्लान
चयनित कंसल्टेंसी एजेंसी को एक वर्ष के भीतर प्रस्तावित परियोजना का विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करना होगा। पीटीआर के उत्तर डिवीजन अंतर्गत फुलवारिया क्षेत्र में 500 एकड़ भूमि पर इस परियोजना के निर्माण के लिए स्थल चिन्हित किया जा चुका है। वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना राज्य की एक महत्वाकांक्षी योजना मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना, पर्यटन और होटल उद्योग को बढ़ावा देना तथा क्षेत्रीय विकास को गति देना है। साथ ही बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा और पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह क्षेत्र पलामू टाइगर रिजर्व के कोर या बफर जोन में शामिल नहीं है, इसलिए इसे केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
कार्बन न्यूट्रल होगी परियोजना, बनेगा मिनी जिराफ टावर
प्रस्तावित टाइगर सफारी परियोजना में पर्यटकों और वन्यजीवों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए कई आधुनिक व्यवस्थाएं की जाएंगी। इसमें निगरानी टावर, विशेष रूप से डिजाइन किए गए सफारी वाहन, अत्याधुनिक पशु चिकित्सा अस्पताल, रिसेप्शन सेंटर और अन्य पर्यटक सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही हरित क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए लगभग 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में वन्यजीव चिकित्सा अस्पताल, रेस्टोरेंट और शैक्षिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। परियोजना के अंतर्गत वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएंगे तथा इसे पूरी तरह कार्बन न्यूट्रल बनाने की योजना है।
