ईंधन के दाम बढ़ने से मोबाइल रिचार्ज भी हो सकता है महंगा

देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद टेलीकॉम कंपनियां मोबाइल रिचार्ज की कीमतें बढ़ा सकती हैं।

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी के बाद अब टेलीकॉम कंपनियों द्वारा मोबाइल टैरिफ बढ़ाने की आशंका गहरा गई है। ईंधन की कीमतें बढ़ने से देश भर में संचालित होने वाले लाखों मोबाइल टावरों की परिचालन लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के मासिक मोबाइल रिचार्ज पर पड़ सकता है।

ईंधन महंगाई की मार अब टेलीकॉम सेक्टर पर पड़ने की आशंका

देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई हालिया बढ़ोतरी का सीधा असर अब टेलीकॉम सेक्टर पर पड़ता दिखाई दे रहा है। ईंधन के दामों में वृद्धि के कारण मोबाइल टावर ऑपरेटरों और टेलीकॉम कंपनियों की कुल परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) काफी बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप, कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई करने के लिए आने वाले दिनों में मोबाइल टैरिफ में बड़ा बदलाव कर सकती हैं, जिससे ग्राहकों के लिए मोबाइल रिचार्ज कराना अधिक महंगा हो सकता है।

भारत मंथन Live News के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा दर्ज किया जा चुका है।

जानिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों और मोबाइल रिचार्ज का क्या है सीधा संबंध

एक आम उपभोक्ता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पेट्रोल और डीजल के महंगे होने का मोबाइल नेटवर्क या रिचार्ज से क्या लेना-देना है। इसका मुख्य कारण देश भर में फैले वे लाखों मोबाइल टावर हैं, जो उपभोक्ताओं के फोन को चौबीसों घंटे नेटवर्क से जोड़े रखने के लिए बिना रुके काम करते हैं। इन टावरों को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए बिजली के साथ-साथ भारी मात्रा में डीजल और ईंधन की आवश्यकता होती है।

एक प्रमुख टेलीकॉम रिपोर्ट (Telecomtalk) के आंकड़ों के मुताबिक, किसी भी मोबाइल टावर को चालू रखने में जो कुल खर्च आता है, उसका लगभग 40 फीसदी हिस्सा अकेले बिजली और ईंधन पर व्यय होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि टावर संचालन के हर 100 रुपये के कुल खर्च में से 40 रुपये सिर्फ टावर को क्रियाशील रखने के लिए ईंधन पर खर्च किए जाते हैं।

टेलीकॉम कंपनियों पर पड़ेगा सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ

ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी होने के कारण अब इन टावरों को चलाने का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इस मूल्यवृद्धि से देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों पर सामूहिक रूप से सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

विशेषज्ञों और बाजार के रुझानों के अनुसार, कंपनियां इस बढ़े हुए वित्तीय भार को खुद वहन करने के बजाय अंततः मोबाइल टैरिफ दरों में बढ़ोतरी करके इसे आम उपभोक्ताओं की जेब पर डाल सकती हैं।

बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमतें 107 रुपये प्रति लीटर के पार

वर्तमान में ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की परेशानियों को पहले ही बढ़ा रखा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुंबई और बेंगलुरु जैसे देश के कई बड़े महानगरों और शहरों में पेट्रोल की कीमतें 107 रुपये प्रति लीटर के उच्च स्तर तक पहुंच चुकी हैं। इस ईंधन महंगाई के बीच अब मोबाइल रिचार्ज के भी महंगे होने की आशंका ने मध्यम और गरीब वर्ग के घरेलू बजट को लेकर चिंताएं और अधिक बढ़ा दी हैं।

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