डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला के एक नए प्रकोप के कारण अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। देश के स्वास्थ्य मंत्री ने शनिवार को चेतावनी दी कि बिना किसी उपलब्ध टीके या विशिष्ट उपचार वाले इस दुर्लभ ‘बुंडिबुग्यो’ स्ट्रेन की मृत्यु दर बेहद उच्च है, जो पड़ोसी देश युगांडा तक फैल चुका है।
कांगो में इबोला के खतरनाक ‘बुंडिबुग्यो’ स्ट्रेन से मचा हड़कंप
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल का सामना कर रहा है, जहां इबोला का एक नया प्रकोप तेजी से पैर पसार रहा है। देश के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कांबा ने शनिवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में चेतावनी दी कि वर्तमान में सक्रिय इबोला वायरस का स्ट्रेन अत्यधिक घातक है। स्वास्थ्य अधिकारियों के पास इस विशिष्ट स्ट्रेन से निपटने के लिए कोई स्वीकृत टीका या सटीक इलाज मौजूद नहीं है।
भारत मंथन लाइव न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है, जो कि पिछले दिन दर्ज की गई 65 मौतों के आंकड़ों से काफी अधिक है।
पड़ोसी देश युगांडा तक पहुंची इबोला की दस्तक
इस जानलेवा वायरस ने अब अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को भी पार कर लिया है। पड़ोसी देश युगांडा में कांगो के एक 59 वर्षीय नागरिक की इस वायरस के संक्रमण के कारण मौत हो गई है। युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस व्यक्ति को इलाज के लिए कंपाला के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया। मौत के बाद उसके शव को वापस कांगो भेज दिया गया है।
प्रयोगशाला में की गई जांच से पुष्टि हुई है कि मृतक ‘बुंडिबुग्यो’ (Bundibugyo) स्ट्रेन से संक्रमित था। इस स्ट्रेन की पहचान पहली बार वर्ष 2007 में की गई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दुनिया में वर्तमान में उपलब्ध इबोला के टीके केवल ‘जायरे’ (Zaire) स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी हैं, जिसकी पहचान 1976 में हुई थी।
इटुरी प्रांत में तेजी से फैल रहा है संक्रमण
अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) के अनुसार, इस नए प्रकोप का केंद्र पूर्वोत्तर कांगो का इटुरी प्रांत है। यह भौगोलिक क्षेत्र युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमाओं से सटा हुआ है, जिसके कारण सीमा पार लोगों की भारी आवाजाही से संक्रमण का खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ गया है।
चिकित्सीय जांच में एक स्थानीय नर्स को ‘पेशेंट जीरो’ (पहला संक्रमित मरीज) माना गया है। इस नर्स को 24 अप्रैल को प्रांतीय राजधानी बुनिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसमें तेज बुखार, उल्टी और शरीर से खून बहने जैसे इबोला के प्रारंभिक लक्षण देखे गए थे।
चिकित्सा बुनियादी ढांचे पर बढ़ा भारी दबाव
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रातभर में आंकड़े अपडेट करते हुए बताया कि स्वास्थ्य प्रणालियों में अब तक कुल 246 संदिग्ध मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 80 मरीजों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सामुदायिक स्तर पर फैल रहे इस संक्रमण की रफ्तार पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डब्ल्यूएचओ संक्रमण को रोकने के लिए प्रांतीय क्षेत्रों में पांच टन सुरक्षा सामग्री और उपकरण एयरलिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि, 10 करोड़ से अधिक की आबादी वाले और फ्रांस से चार गुना बड़े इस देश में संचार और परिवहन का बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर है। इसके कारण इतनी बड़ी मात्रा में चिकित्सा उपकरणों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना स्वास्थ्य संगठनों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
