रांची: राजधानी रांची में नगर निगम चुनाव को लेकर सरगर्मी चरम पर है। मेयर और 53 वार्ड पार्षदों के चुनाव के लिए 23 फरवरी 2026 को मतदान होगा, जबकि 27 फरवरी को मतगणना की जाएगी। सभी उम्मीदवार प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं।
1986 से 2026 तक: कितना बदला चुनाव और शहर?
गठन और शुरुआत
संयुक्त बिहार के दौर में रांची नगरपालिका और डोरंडा नगरपालिका को मिलाकर रांची नगर निगम का गठन किया गया।
1986 में पहली बार चुनाव हुए, तब 37 वार्ड थे।
तब और अब का फर्क
- 1986 में चुनाव खर्च: ₹1,000–1,500 में चुनाव संभव
- आज: चुनाव काफी महंगे हो चुके हैं
- तब: सोशल मीडिया और टीवी प्रचार नहीं, दीवार लेखन और डोर-टू-डोर कैंपेन
- अब: डिजिटल और हाईटेक प्रचार
पूर्व पार्षद राजीव रंजन मिश्रा के अनुसार, उस समय संसाधन कम थे, लेकिन सफाई व्यवस्था निगम खुद संभालता था। आज कई सेवाएं थर्ड पार्टी के जरिए संचालित हो रही हैं।
आधी आबादी की बढ़ी भागीदारी
पहले 37 पार्षदों में सिर्फ 2 महिलाएं थीं।
अब 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिससे नगर निकाय का स्वरूप बदल गया है।
बढ़ी आय, बदला इंफ्रास्ट्रक्चर
पूर्व पार्षद अरुण झा के मुताबिक:
- 2016 तक निगम की आय करीब ₹13 करोड़ थी
- अब यह बढ़कर ₹100 करोड़ तक पहुंच चुकी है
इससे सड़कों का चौड़ीकरण, स्ट्रीट लाइट, आधुनिक सफाई मशीनें और शहरी सुविधाओं में बड़ा सुधार हुआ है।
वार्डों की संख्या में बदलाव
- 1986: 37 वार्ड
- 2008 व 2013: 55 वार्ड
- 2018 परिसीमन के बाद: 53 वार्ड
- 2026 में भी 53 वार्डों में चुनाव
रांची की “शहर सरकार” चुनने के इस महापर्व में इस बार भी 53 वार्डों के लिए मतदान होगा।
