झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में राज्य में स्वीकृत पदों के मुकाबले 1.64 लाख रिक्त पदों का मुद्दा उठाया गया। गढ़वा से भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने सरकार से पूछा कि 3.51 लाख स्वीकृत पदों में से लगभग 45 प्रतिशत पद खाली क्यों हैं और इन्हें कब तक भरा जाएगा।
झारखंड विधानसभा में उठा रिक्त पदों का मुद्दा
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य में स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में रिक्त पदों का मामला सदन में उठाया गया। गढ़वा से भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया।
उन्होंने ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में 3,51,000 स्वीकृत पदों के मुकाबले 1,64,000 पद रिक्त हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन पदों को कब तक भरा जाएगा और इतनी बड़ी संख्या में पद खाली क्यों हैं।
विभागों की अधियाचना के आधार पर होगी भर्ती
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि रिक्त पदों का विवरण वित्त विभाग की रिपोर्ट के आधार पर दिया गया है। उन्होंने बताया कि एचआरएमएस में संख्या को लेकर त्रुटि की संभावना रहती है।
उन्होंने कहा कि सरकार रिक्त पदों को भरने की दिशा में काम कर रही है। विभागों की ओर से अधियाचना मिलने के बाद जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी किए जाएंगे।
वर्षों से स्वीकृत पदों के खाली रहने पर सवाल
सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि जिन रिक्त पदों की बात की जा रही है, वे 20 से 25 वर्षों से स्वीकृत हैं। इस दौरान सरकार ने नए पदों की स्वीकृति नहीं दी है।
उन्होंने कहा कि पुराने जनसंख्या आधार पर स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत पद खाली होना चिंता का विषय है। उनके अनुसार, रिक्त पदों के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया जारी रहने की बात कही
मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि सरकार स्वीकृत पदों के अनुसार मानव संसाधन की नियुक्ति करना चाहती है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर अधियाचना आने के बाद ही रिक्तियों को भरा जा सकता है।
उन्होंने स्वीकार किया कि प्रक्रिया में कुछ विलंब हो सकता है, लेकिन सरकार रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयास कर रही है।
सरकार ने 30 हजार से अधिक नियुक्तियां होने की जानकारी दी
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि रिक्तियों के निर्धारण में वित्त विभाग की भी भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि कई रिक्तियां 20 से 25 वर्षों से चली आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मानव बल बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में अब तक 30 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं।
सदन में उठे अतिरिक्त सवाल
इस दौरान भाजपा विधायक सीपी सिंह ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि विभागों से अधियाचना नहीं आएगी तो क्या पद खाली ही रहेंगे। उन्होंने सरकार से पूछा कि रिक्त पदों को भरने की समय सीमा क्या है।
वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग की व्यवस्था पूर्ववर्ती सरकार के समय लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार धीरे-धीरे आउटसोर्सिंग को समाप्त कर रही है और नियमित नियुक्तियों की दिशा में काम कर रही है।
