नालंदा विश्वविद्यालय में साउथईस्ट एशिया स्टडीज सेंटर का उद्घाटन

नालंदा विश्वविद्यालय में साउथईस्ट एशिया स्टडीज सेंटर उद्घाटन समारोह और शैक्षणिक गतिविधियां

झारखंड के नालंदा विश्वविद्यालय में 2026 में साउथईस्ट एशिया स्टडीज सेंटर की स्थापना की गई। यह केंद्र भारत-आसियान संबंधों को गहराई देने, नीति और संस्कृति से जोड़ने तथा लोगों के बीच मजबूत संपर्क बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

नालंदा विश्वविद्यालय में साउथईस्ट एशिया स्टडीज सेंटर

नालंदा विश्वविद्यालय, जो प्राचीन समय में एशिया में ज्ञान का केंद्र था, में अब साउथईस्ट एशिया स्टडीज सेंटर खोला गया है। इसे विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने 1 अप्रैल 2026 को उद्घाटित किया। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अक्टूबर 2025 में 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में की गई घोषणा के अनुरूप है।

केंद्र का उद्देश्य

केंद्र केवल एक शैक्षणिक इकाई नहीं है, बल्कि यह भारत और आसियान देशों के बीच नीति, इतिहास और रणनीति का सेतु बनने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें 10 अंतरविषयक शोध समूह शामिल हैं, जिनमें जलवायु, समुद्री अध्ययन, व्यापार, सांस्कृतिक विरासत, सार्वजनिक स्वास्थ्य, प्रवासन, डिजिटल सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संबंध शामिल हैं।

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह केंद्र भारत और साउथईस्ट एशिया के बीच शैक्षणिक शोध को मजबूत करने, नीति निर्माण का समर्थन करने और सांस्कृतिक-सिविलाइजेशन संबंधों को गहरा करने में मदद करेगा।

नालंदा विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक महत्व

बिहार के राजगीर पहाड़ियों के पास स्थित नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था। इसे 427 ईस्वी में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त ने स्थापित किया था। नालंदा ने 12वीं शताब्दी तक लगभग 800 वर्षों तक शिक्षा दी। इतिहास में नालंदा में 2,000 शिक्षक और 10,000 छात्र थे, और यह चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, मंगोलिया, श्रीलंका और साउथईस्ट एशिया से विद्वानों को आकर्षित करता था।

सांस्कृतिक और बौद्धिक कनेक्शन

साउथईस्ट एशियाई अध्ययन के माध्यम से भारत ने साझा बौद्ध और सभ्यतागत विरासत को एक जीवंत सेतु के रूप में स्थापित किया है। यह पहल लोगों के बीच स्थायी संपर्क और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी।

रणनीतिक और नीति संबंधी पहल

नालंदा विश्वविद्यालय में केंद्र की स्थापना से दक्षिण-एशिया और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर शोध, समुद्री कानून, व्यापार गलियारे, डिजिटल अर्थव्यवस्था और जलवायु-संबंधी प्रबंधन पर वार्ता संभव होगी।

विशेषज्ञों की टिप्पणियाँ

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रीकांतकोंडापल्ली ने कहा कि यह केंद्र बौद्ध पर्यटन और पेशेवर अध्ययन के लिए सहायक होगा। वहीं, एशियन कॉन्फ्लुएंस के K. योहोम ने कहा कि यह पहल भारत की ऐतिहासिक और सभ्यतागत कड़ियों को साउथईस्ट एशिया के साथ मजबूत करने में सहायक होगी।

निष्कर्ष

नालंदा विश्वविद्यालय का साउथईस्ट एशिया स्टडीज सेंटर केवल शैक्षणिक पहल नहीं है, बल्कि यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत ज्ञान, संस्कृति, नीति और रणनीति का संयोजन है। यह केंद्र नीति-निर्माण, बौद्धिक संवाद और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक प्रमुख साधन है।

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