नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले जिन मतदाताओं के दावे स्वीकार किए गए हैं, उनके लिए संशोधित मतदाता सूची जारी की जाए। यह आदेश 21 और 27 अप्रैल की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले जिन मतदाताओं के दावे पक्ष में तय किए गए हैं, उनके लिए पूरक संशोधित मतदाता सूची जारी की जाए।
यह निर्देश 21 अप्रैल और 27 अप्रैल की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, क्योंकि राज्य में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
अनुच्छेद 142 के तहत दिया गया आदेश
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 13 अप्रैल के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत यह निर्देश जारी किया जाता है।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे।
अपील और वोटिंग अधिकार पर स्पष्टता
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अपील लंबित होने से किसी व्यक्ति को मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अपील में किसी व्यक्ति के पक्ष में निर्णय आता है, तो उसके अनुसार संशोधित मतदाता सूची में नाम जोड़ा या हटाया जाएगा और उसी के आधार पर मतदान अधिकार लागू होंगे।
बड़ी संख्या में अपीलें दर्ज
कोर्ट ने कहा कि अब तक 34 लाख से अधिक अपीलें दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें गलत तरीके से नाम हटाने और शामिल करने दोनों प्रकार के मामले शामिल हैं।
अपीलीय ट्रिब्यूनल पूरी तरह सक्रिय
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सभी अपीलीय ट्रिब्यूनल का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और वे पूरी तरह कार्यशील हैं। कुल 19 ट्रिब्यूनल 13 अप्रैल 2026 से इस प्रक्रिया में शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं की चिंता पर टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की चिंताएं फिलहाल समय से पहले हैं और यदि उनकी अपील स्वीकार होती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही अदालत ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दे रही है।
