भारत-ऑस्ट्रिया रक्षा समझौता: LoI से यूरोप में नई रणनीतिक साझेदारी

नई दिल्ली में भारत और ऑस्ट्रिया के बीच रक्षा सहयोग LoI पर हस्ताक्षर करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर

नई दिल्ली में 17 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और ऑस्ट्रिया ने सैन्य सहयोग पर Letter of Intent (LoI) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत की बढ़ती यूरोपीय रक्षा कूटनीति में एक अहम कदम माना जा रहा है।

भारत-ऑस्ट्रिया रक्षा सहयोग पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सैन्य सहयोग को लेकर Letter of Intent (LoI) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रियाई चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की उपस्थिति में हुआ।

यह कदम भारत की यूरोपीय देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रक्षा सहयोग के लिए संस्थागत ढांचा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह LoI दोनों देशों के बीच सैन्य मामलों, रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करेगा।

इसमें रक्षा नीति संवाद, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल होगा।

भारत-ईयू साझेदारी से जुड़ाव

यह समझौता भारत-यूरोपीय संघ रक्षा और सुरक्षा साझेदारी (EU-India Defence and Security Partnership) के आधार पर आगे बढ़ाया गया है, जिसे इस वर्ष 27 जनवरी को हस्ताक्षरित किया गया था।

इससे दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरे, आतंकवाद विरोध और स्पेस सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूती मिलेगी।

रक्षा औद्योगिक सहयोग पर जोर

LoI के तहत भारत और ऑस्ट्रिया के बीच रक्षा उद्योग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें संयुक्त प्रशिक्षण, क्षमता विकास और रणनीतिक संवाद शामिल होंगे।

यह सहयोग भारत की ‘Make in India’ रक्षा उत्पादन पहल को भी समर्थन प्रदान करेगा, जिसके तहत भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है।

ऑस्ट्रिया की भूमिका और तटस्थ नीति

ऑस्ट्रिया लंबे समय से तटस्थ विदेश नीति के लिए जाना जाता रहा है, जिसे 1955 में संवैधानिक रूप से मान्यता मिली थी। हालांकि हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के बाद उसकी सुरक्षा नीति में बदलाव के संकेत मिले हैं।

भारत के साथ यह साझेदारी ऑस्ट्रिया को यूरोपीय संघ के भीतर एक संतुलित और तटस्थ साझेदार के रूप में भी स्थापित करती है।

साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते में साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीक सहयोग एक महत्वपूर्ण पहलू है। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक, साइबर वारफेयर और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है।

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन पर सहयोग

दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग को भी मजबूत करने पर सहमति जताई है। इसके तहत भारत के सेंटर फॉर UN पीसकीपिंग और ऑस्ट्रियाई आर्म्ड फोर्सेज इंटरनेशनल सेंटर के बीच साझेदारी प्रस्तावित है।

भारत की वैश्विक रणनीति में अहम कदम

यह समझौता भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह रूस और पश्चिमी देशों सहित विभिन्न वैश्विक साझेदारों के बीच संतुलन बनाते हुए अपने रक्षा और तकनीकी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है।

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