मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के शहरी मजदूरों को बड़ी राहत देते हुए दाल-भात केंद्रों के विस्तार का निर्देश दिया है। इस योजना के तहत राज्य के शहरी श्रमिकों को चिन्हित स्थानों पर मात्र 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में सीएम ने इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर बल दिया।
झारखंड में मजदूरों को मात्र 5 रुपये में मिलेगा भरपेट भोजन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के शहरी श्रमिकों को बड़ी राहत प्रदान करने के उद्देश्य से दाल-भात केंद्रों के विस्तार का कड़ा निर्देश जारी किया है। इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत नए स्थानों को चिन्हित कर अधिक संख्या में केंद्रों की स्थापना की जाएगी, जहां गरीब और जरूरतमंद श्रमिकों को सिर्फ 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, मुख्यमंत्री सोरेन ने संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शहरी श्रमिकों की सुविधा के अनुसार नए स्थानों को चिन्हित करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करें। मंगलवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में खाद्यान्न वितरण प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी, जवाबदेह और आम जनता के लिए सुलभ बनाना वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से आधुनिक तकनीक और नए तौर-तरीकों को अपनाकर इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने को कहा ताकि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
वर्तमान में संचालित हो रहे हैं 370 दाल-भात केंद्र
समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान समय में पूरे राज्य के भीतर कुल 370 दाल-भात केंद्र सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी सक्रीय केंद्रों पर लोगों को मात्र पांच रुपये की किफायती दर पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री ने वर्तमान केंद्रों की संख्या को नाकाफी बताते हुए इनमें बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहरी श्रमिकों की सघनता वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर नए दाल-भात केंद्र स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने व्यवस्था को और आधुनिक बनाने के लिए कुछ चुनिंदा केंद्रों को ‘मॉडल केंद्र’ के रूप में विकसित करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का विस्तार बेहद जरूरी है ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े अधिक से अधिक लोगों को भोजन सुरक्षा मिल सके।
पीवीटीजी डाकिया योजना और नमक वितरण की भी हुई समीक्षा
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विशेष जनजाति खाद्यान्न सुरक्षा योजना (पीवीटीजी डाकिया योजना) की प्रगति की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि डोर स्टेप डिलीवरी (घर तक अनाज पहुंचाने की व्यवस्था) के माध्यम से सभी पीवीटीजी परिवारों को पूरी तरह से समय पर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए, इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्य महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे सोना-सोबरन धोती-साड़ी वितरण योजना, मुख्यमंत्री दाल-भात योजना और मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना की भी बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
