माध्यमग्राम, उत्तर 24 परगना में 43 वर्षीय सुमिताभ मुखर्जी ने 17 अप्रैल 2026 को जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन देकर परिवार सहित स्वैच्छिक मृत्यु की अनुमति मांगी। उनका नाम स्पेशल इंटेंसिव रिविजन प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया।
वोटर लिस्ट से नाम हटने पर उठाया बड़ा कदम
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के माध्यमग्राम क्षेत्र के कोरा बाबूपारा गांव के निवासी सुमिताभ मुखर्जी ने जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर स्वैच्छिक मृत्यु की अनुमति मांगी है।
उन्होंने यह कदम तब उठाया जब स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के बाद उनका नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिया गया।
सभी दस्तावेज देने के बावजूद नाम हटने का आरोप
सुमिताभ मुखर्जी, जो पेशे से ड्राइवर हैं, ने बताया कि वह 2002 से लगातार वोटर रहे हैं। उनका नाम ड्राफ्ट सूची में भी शामिल था और उन्होंने 5 जनवरी को ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) कार्यालय में सुनवाई के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे।
इसके बावजूद अंतिम सूची में उनका नाम “डिलीटेड” दिखाया गया, जबकि उनके माता-पिता और पत्नी का नाम सूची में बना हुआ है।
मानसिक तनाव और डिटेंशन का डर
मुखर्जी ने कहा कि मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गए हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि चल रही प्रक्रिया के बीच उन्हें डिटेंशन कैंप भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो वह इसे सहन नहीं कर पाएंगे और उनके परिवार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा, इसका कोई जवाब नहीं मिला।
इसी कारण उन्होंने अपने और अपने परिवार के लिए इच्छामृत्यु की मांग की है।
संदिग्ध नाम शामिल होने पर उठाए सवाल
मुखर्जी ने यह भी दावा किया कि “सुप्रिति बिस्वास” नामक एक व्यक्ति, जिसे उन्होंने बांग्लादेशी नागरिक बताया, का नाम उनके नाम के पास सूची में दर्ज है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति ने माध्यमग्राम के पते का उपयोग कर अवैध रूप से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया है। उन्होंने इस मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
प्रशासन ने ट्रिब्यूनल को भेजा मामला
इस आवेदन के बाद जिला प्रशासन ने मामले को ट्रिब्यूनल को भेजने की बात कही है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट शिल्पा गौरिसारिया ने कहा कि अंतिम निर्णय ट्रिब्यूनल द्वारा लिया जाएगा।
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
मुखर्जी ने चुनाव आयोग से अपील करते हुए कहा कि वैध मतदाताओं को इस तरह सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
हुगली में भी सामने आया समान मामला
इससे पहले हुगली जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां छह लोगों, जिनमें पूर्व स्कूल प्रधानाध्यापिका ताइबुन्नेसा बेगम शामिल हैं, ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए पत्र लिखा था।
इन सभी के पास आवश्यक दस्तावेज और मतदान का इतिहास होने के बावजूद नाम हटने से उनमें डिटेंशन का डर बना हुआ है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर लोगों की जान जोखिम में डालने का आरोप लगाया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक नाटक बताया है।
