रांची में ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के खिलाफ हजारों महिला कर्मचारी दूसरे दिन भी धरने पर डटी रहीं। तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के आरोप को लेकर कंपनी गेट के बाहर प्रदर्शन जारी है, जिससे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
रांची में ओरिएंट क्राफ्ट के खिलाफ विरोध तेज
रांची में गारमेंट कंपनी ओरिएंट क्राफ्ट के खिलाफ महिला कर्मचारियों का विरोध दूसरे दिन भी जारी है। हजारों की संख्या में महिलाएं कंपनी के गेट के बाहर धरने पर बैठकर प्रदर्शन कर रही हैं।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
वेतन न मिलने से बढ़ी मुश्किलें
महिलाओं के अनुसार, हर महीने 7 तारीख को वेतन देने का वादा किया जाता है, लेकिन यह वादा बार-बार पूरा नहीं होता। वेतन नहीं मिलने के कारण घर चलाना और किराया देना भी कठिन हो गया है।
कर्मचारियों ने बताया कि उनकी मासिक आय लगभग 13,000 से 17,000 रुपये के बीच है, जिसमें से करीब 3,000 रुपये किराए में खर्च हो जाते हैं।
ओवरटाइम और शोषण के आरोप
महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि न केवल वेतन रोका गया है, बल्कि कई वर्षों से सैलरी में कोई बढ़ोतरी भी नहीं हुई है।
इसके अलावा, उनसे रोजाना आधे से पौन घंटे तक अतिरिक्त काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता।
इन कर्मचारियों में रांची के आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से आई महिलाएं भी शामिल हैं।
प्रबंधन ने आर्थिक नुकसान बताया
कंपनी प्रबंधन ने इस मामले में आर्थिक नुकसान और वैश्विक परिस्थितियों का हवाला दिया है।
प्रबंधन के अनुसार, युद्ध जैसी स्थिति और अमेरिका-भारत ट्रेड डील से जुड़े प्रभाव के कारण कंपनी को वित्तीय नुकसान हो रहा है।
हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि नुकसान की बात के बावजूद उनसे तय लक्ष्य के अनुसार काम लिया जा रहा है और वेतन बढ़ोतरी की मांग टाल दी जाती है।
जमीन आवंटन पर उठे सवाल
इस विवाद के बीच फैक्ट्री को दी गई जमीन के आवंटन को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि यह जमीन पहले पशुपालन विभाग की थी।
आरोप है कि पूर्व रघुवर दास सरकार ने रांची के होटवार क्षेत्र में 25 एकड़ जमीन गारमेंट कंपनी को एक रुपये में दी थी, यह कहते हुए कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, इस जमीन पर टेक्सटाइल्स पार्क विकसित किया गया है, जिसमें 10 एकड़ में प्लांट और कार्यालय स्थापित हैं।
बाकी 15 एकड़ जमीन को एक-एक एकड़ के प्लॉट में बांटकर अन्य कंपनियों को सबलेट करने की बात भी सामने आई है।
विरोध जारी, स्थिति तनावपूर्ण
वेतन और अन्य मांगों को लेकर जारी यह विरोध लगातार दूसरे दिन भी जारी है। फिलहाल इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
