दुमका-गिरिडीह में नए चिड़ियाघर: 200 वन्यजीवों को आवास

दुमका और गिरिडीह में प्रस्तावित चिड़ियाघरों के लिए प्राकृतिक आवास की तैयारी

रांची में गुरुवार को जानकारी दी गई कि दुमका और गिरिडीह में आधुनिक चिड़ियाघरों के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। इन चिड़ियाघरों में करीब 200 वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

दुमका और गिरिडीह में चिड़ियाघर निर्माण तेज

रांची: राज्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दुमका और गिरिडीह में दो नए चिड़ियाघरों के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रस्तावित चिड़ियाघरों में करीब 200 वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

वन विभाग के अनुसार, इन चिड़ियाघरों के लिए देश के विभिन्न वन प्रभागों और नेशनल पार्कों से वन्यजीव लाए जाएंगे।

दलमा और सारंडा में होगा अनुकूलन

नए स्थान पर लाए गए वन्यजीवों को सीधे चिड़ियाघर में नहीं रखा जाएगा। पहले उन्हें दलमा और सारंडा के रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा, जहां वे स्थानीय जलवायु के अनुसार खुद को अनुकूलित कर सकें।

सारंडा क्षेत्र में एक नई सफारी विकसित करने की भी योजना है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों की सलाह और सावधानियां

वन्यजीव विशेषज्ञ शादाब हाशमी के अनुसार, बाघ और चीता जैसे वन्यजीव नए वातावरण में आसानी से सामंजस्य नहीं बैठा पाते हैं। यदि उन्हें अनुकूल माहौल नहीं मिलता, तो उनकी मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है।

कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों की मौत के बाद केंद्रीय वन्यजीव संस्थान ने ट्रांसपोर्ट और पुनर्वास से जुड़े मानकों को और कड़ा किया है।

चिकित्सा सुविधा और बाघ रखने की योजना

इन चिड़ियाघरों में वन्यजीवों के स्थानांतरण के बाद उनकी चिकित्सा सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए वन्यजीव संस्थान से पशु चिकित्सालय स्थापित करने हेतु तकनीकी सहयोग मांगा गया है।

वन विभाग दुमका और गिरिडीह में लगभग सात बाघ रखने की योजना बना रहा है। इसके अलावा रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से चीतों को लाने के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों से बातचीत जारी है।

प्राकृतिक आवास तैयार करने पर जोर

विशेषज्ञों ने निर्देश दिया है कि चिड़ियाघरों में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास तैयार किए जाएं। हाल ही में केंद्रीय वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण कर साल के पेड़ लगाने और बड़े चट्टानों को संरक्षित रखने की सलाह दी है, ताकि वन्यजीवों को प्राकृतिक परिवेश जैसा अनुभव मिल सके।

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