झारखंड में 26 अप्रैल तक बालू घाटों से वैध उठाव शुरू नहीं होने के कारण संकट गहरा गया है। 16 जिलों के 229 घाट बंद हैं, जिससे अवैध खनन बढ़ा है और राज्य सरकार को प्रतिदिन करीब 6 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
झारखंड में बालू संकट और अवैध खनन बढ़ा
झारखंड में बालू घाटों की बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक वैध बालू उठाव शुरू नहीं हो सका है। इसका सीधा फायदा अवैध कारोबारियों को मिल रहा है, जो रात में नदियों से बालू निकालकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।
इस स्थिति के कारण राज्य में बालू संकट गहरा गया है और आम लोगों को महंगे दाम पर बालू खरीदना पड़ रहा है।
229 बालू घाटों का टेंडर पूरा, संचालन लंबित
राज्य के 16 जिलों में कुल 229 बालू घाटों का टेंडर लगभग छह माह पहले पूरा हो चुका है। इसके बावजूद लीज डीड और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने से वैध संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
सरकार को इन घाटों से एकरारनामा होने पर 473 करोड़ रुपये से अधिक की आय हो सकती है। साथ ही हर वर्ष करीब 2000 करोड़ रुपये रॉयल्टी मिलने का अनुमान है।
बाजार में दोगुनी से ज्यादा कीमत
वैध आपूर्ति ठप रहने के कारण बाजार में बालू की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। पहले एक ट्रैक्टर बालू 2000 से 2500 रुपये में मिलता था, जो अब बढ़कर 6000 से 7000 रुपये तक पहुंच गया है।
इसी तरह एक हाइवा बालू की कीमत 25 हजार से 35 हजार रुपये तक हो गई है। इसका असर निर्माण कार्यों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
लीज डीड और मंजूरी प्रक्रिया में देरी
बालू घाट शुरू नहीं होने का मुख्य कारण लीज डीड प्रक्रिया का लंबित रहना है। जिला प्रशासन द्वारा यह प्रक्रिया पूरी की जानी है, लेकिन कई जिलों में अभी तक काम अधूरा है।
इसके अलावा पर्यावरण स्वीकृति (EC), माइनिंग प्लान और अन्य तकनीकी मंजूरियों में भी देरी हो रही है। अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की सहमति आवश्यक होने से प्रक्रिया और लंबी हो गई है।
10 जून से फिर लग जाएगी रोक
हर वर्ष 10 जून से 15 अक्टूबर तक मॉनसून अवधि में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशानुसार बालू घाटों से निकासी बंद रहती है। यदि जल्द वैध उठाव शुरू नहीं हुआ, तो अगले पांच महीनों तक स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सरकार ने प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए
खान विभाग ने लंबित प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। जिन घाटों की पर्यावरण मंजूरी लंबित है, उन्हें राज्य स्तरीय समिति द्वारा प्राथमिकता पर देखा जा रहा है।
रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है और जिन घाटों में प्रक्रिया रुकी हुई है, उन्हें जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, वैध आपूर्ति बंद रहने के कारण झारखंड में बालू संकट और अवैध खनन दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।
