भारतीय तटों पर माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण का मुख्य कारण नदियों का बहाव और फेंके गए मत्स्य पालन उपकरण (ALDFG) हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR) तटीय पर्यावरण में प्लास्टिक और समुद्री कचरे की लगातार निगरानी कर रहा है।
तटीय क्षेत्रों में बढ़ रहा माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण
देश के तटीय क्षेत्रों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती बन रहा है। लोकसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि विभिन्न अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि नदियों का बहाव और समुद्र में छोड़े गए या खोए हुए मत्स्य पालन उपकरण (ALDFG) भारतीय तटों पर माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के सबसे प्रमुख स्रोत हैं।
एनसीसीआर द्वारा क्लीन कोस्ट इंडेक्स का विकास
तटीय पर्यावरण की सुरक्षा और निगरानी के लिए नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च (NCCR) लगातार काम कर रहा है। मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि NCCR भारतीय तटों पर चुने गए स्थानों पर माइक्रोप्लास्टिक, मेसोप्लास्टिक, मैक्रोप्लास्टिक और समुद्री कचरे की नियमित निगरानी करता है।
कचरे के आकलन के लिए नया तंत्र
NCCR ने तटीय पर्यावरण में उपलब्ध माइक्रोप्लास्टिक और मैक्रोप्लास्टिक आंकड़ों की बहुलता के आधार पर एक ‘क्लीन कोस्ट इंडेक्स’ (CCI) विकसित किया है। इस इंडेक्स के माध्यम से तटीय इलाकों में स्वच्छता और प्लास्टिक कचरे के घनत्व का सटीक आकलन किया जाता है।
प्लास्टिक प्रदूषण पर अंकुश के लिए नीतिगत कदम
केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि पर्यावरण मंत्रालय ने प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत उपाय लागू किए हैं। इनमें कम उपयोगिता और अधिक कचरा फैलाने की क्षमता वाले सिंगल-यूज प्लास्टिक (SUP) वस्तुओं पर 1 जुलाई 2022 से लगाया गया प्रतिबंध शामिल है।
ईपीआर फ्रेमवर्क के तहत 232 लाख टन कचरे का प्रसंस्करण
सरकार ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 को अधिसूचित कर प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) दिशानिर्देश पेश किए हैं। ये दिशानिर्देश rigid प्लास्टिक पैकेजिंग के संग्रह, पुनर्चक्रण (recycling), पुनरुपयोग और रिसाइकल्ड प्लास्टिक के उपयोग के लिए अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित करते हैं। मंत्री ने बताया कि 2022 से अब तक ईपीआर ढांचे के तहत लगभग 232 लाख टन प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे को संसाधित किया जा चुका है।
