ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) संगठनों के आह्वान पर बुधवार को देशभर के करीब 15 लाख केमिस्ट अपनी दुकानें बंद रखकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं। ऑनलाइन दवा बिक्री, नीतिगत बदलावों और लाइसेंस से जुड़े मुद्दों के विरोध में की गई इस हड़ताल से दिल्ली, बिहार और झारखंड सहित कई राज्यों में मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में उतरे 15 लाख केमिस्ट, देशव्यापी बंद से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) संगठनों के केंद्रीय आह्वान पर आज देश भर के दवा दुकानदारों की एक बड़ी और व्यापक हड़ताल देखने को मिल रही है। इस देशव्यापी आंदोलन के तहत पूरे देश में लगभग 15 लाख से अधिक केमिस्टों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए हैं और वे सामूहिक विरोध पर चले गए हैं। इस अचानक हुई देशव्यापी बंदी के कारण नियमित रूप से दवाइयां खरीदने वाले मरीजों और उनके आश्रित परिवारों की व्यावहारिक मुश्किलें अत्यधिक बढ़ गई हैं, विशेषकर उन गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए जिन्हें प्रतिदिन जीवन रक्षक औषधियों की सख्त जरूरत होती है।
केमिस्ट संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल मुख्य रूप से ई-फार्मेसी यानी ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने, दवा व्यवसाय से जुड़े कुछ हालिया नीतिगत बदलावों को वापस लेने और रिटेल लाइसेंस से संबंधित जटिल प्रशासनिक मुद्दों के विरोध में बुलाई गई है। इन्हीं मांगों को लेकर विभिन्न राज्यों के राज्य स्तरीय संगठनों ने भी एकजुटता दिखाते हुए मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रखने का कड़ा फैसला लिया है। हालांकि, आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ गिने-चुने संवेदनशील क्षेत्रों में सरकारी निर्देश पर बेहद सीमित राहत या वैकल्पिक व्यवस्था दी गई है।
दिल्ली, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में पूर्ण बंदी, प्रशासन हुआ अलर्ट
इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का व्यापक और सीधा असर देश के प्रमुख राज्यों जैसे दिल्ली, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में साफ तौर पर देखा जा रहा है। देश के महानगरों, राज्य की राजधानियों से लेकर छोटे जिला मुख्यालयों तक की सभी निजी मेडिकल दुकानों पर ताले लटके नजर आ रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
आम जनता को होने वाली परेशानियों को कुछ कम करने के उद्देश्य से कई बड़े सरकारी और सिविल अस्पतालों के भीतर जरूरी दवाओं का अतिरिक्त बफर स्टॉक आरक्षित किया गया है, ताकि ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को किसी बड़ी समस्या का सामना न करना पड़े। इसके विपरीत, निजी अस्पतालों या नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों के परिजनों को बाहर की दुकानें बंद होने के कारण दवाइयां और सर्जिकल सामान खरीदने में भारी दिक्कतों और आपाधापी का सामना करना पड़ रहा है।
मांगों की अनदेखी का आरोप, सरकार के रुख पर टिकी निगाहें
केमिस्ट एसोसिएशन के शीर्ष नेताओं का स्पष्ट कहना है कि पारंपरिक दवा व्यापारियों की जायज मांगों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लंबे समय से लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। ऑनलाइन कॉरपोरेट कंपनियों के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण छोटे और मध्यम फुटकर दवा दुकानदारों के रोजगार पर गहरा संकट मंडरा रहा है, जिसके कारण विवश होकर उन्हें इस कठोर और ऐतिहासिक देशव्यापी हड़ताल का कदम उठाना पड़ा है।
दूसरी ओर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी अत्यधिक आवश्यक और नियमित दवाओं को आपातकालीन काउंटरों से प्राप्त करने की कोशिश करें। वर्तमान में देश की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था और आम जनता की नजरें अब केंद्र सरकार, संबंधित मंत्रालयों और केमिस्ट संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली आगामी उच्च स्तरीय वार्ता के दौर पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द ही दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में देश के भीतर दवाओं की थोक आपूर्ति श्रृंखला और संपूर्ण नागरिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा सकती हैं। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल की हर जमीनी और आधिकारिक अपडेट के लिए भारत मंथन लाइव न्यूज (Bharat Manthan Live News) के साथ निरंतर बने रहें।
