ओडिशा के कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय में वैदिक धर्म संस्थान द्वारा एक सप्ताहव्यापी वैदिक पंडित सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी की प्रेरणा से 26 मई 2026 तक चलने वाले इस सम्मेलन में देश के 10 राज्यों से आए 75 पंडित हिस्सा ले रहे हैं।
कटक के श्री श्री विश्वविद्यालय में पंडित सम्मेलन शुरू, स्वामी सत्यचैतन्य ने किया उद्घाटन
ओडिशा के कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय के परिसर में प्रामाणिक वैदिक पूजा और होम परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। वैदिक धर्म संस्थान के तत्वावधान में यहां एक सप्ताहव्यापी वैदिक पंडित सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम 26 मई 2026 तक संचालित होगा। इस भव्य आयोजन का विधिवत उद्घाटन श्री श्री विश्वविद्यालय के कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य जी द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वामी सत्यचैतन्य जी ने आज के आधुनिक और तेजी से बदलते समय में प्राचीन वैदिक अनुष्ठानों की शुद्धता, प्रामाणिकता और उनके मूल स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखने के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी की पावन प्रेरणा और कुशल मार्गदर्शन में वैदिक धर्म संस्थान प्राचीन वैदिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा आध्यात्मिक उत्थान के माध्यम से पुनर्जीवित करने के अपने मुख्य मिशन को निरंतर आगे बढ़ाने में जुटा है।
10 राज्यों से पहुंचे 75 विद्वान, पारंपरिक पूजा और मंत्रोच्चारण का दिया जा रहा प्रशिक्षण
इस सप्ताहव्यापी सम्मेलन में देश के 10 अलग-अलग राज्यों से आए कुल 75 अनुभवी पंडित और विद्वान भाग ले रहे हैं। इतने व्यापक प्रतिनिधित्व के कारण यह पूरा आयोजन गहन अध्ययन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक समृद्धि का एक अत्यंत जीवंत मंच बन गया है। इस वर्ष ओडिशा में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन अपनी तरह का एक विशेष प्रयास है, क्योंकि पिछले एक वर्ष के भीतर ही वैदिक धर्म संस्थान देश के विभिन्न भागों में ऐसे चार सफल सम्मेलनों का आयोजन पहले भी संपन्न कर चुका है।
इस पंडित सम्मेलन का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य भाग ले रहे विद्वानों को पूरी तरह से पारंपरिक वैदिक पद्धति के अनुसार पूजा, होम (हवन), शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चारण और अन्य पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों के प्रामाणिक तरीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। संस्थान का मानना है कि इस प्रकार के सामूहिक प्रशिक्षण और विमर्श से सनातन ज्ञान की प्राचीन धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और शुद्ध रूप में संजोकर रखा जा सकेगा।
