संख्या बल नहीं होने के कारण NDA परिमल नाथवाणी को देगा समर्थन

रांची में पत्रकारों से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी जिन्होंने परिमल नाथवाणी को समर्थन देने की घोषणा की

झारखंड विधानसभा परिसर में सोमवार, 8 जून 2026 को पत्रकारों से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संख्या बल की कमी के कारण एनडीए (NDA) आगामी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी का समर्थन करेगा, जिसका निर्णय रणनीतिक आधार पर लिया गया है।

पर्याप्त विधायक न होने के कारण एनडीए का रणनीतिक फैसला: बाबूलाल मरांडी

रांची: झारखंड की राजनीति से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया है कि संख्या बल कम होने के कारण एनडीए (NDA) गठबंधन झारखंड में निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी का समर्थन करेगा। उन्होंने बताया कि यह फैसला पूरी तरह से रणनीतिक आधार पर लिया गया है।

सोमवार, 8 जून 2026 को झारखंड विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बाबूलाल मरांडी ने इस राजनीतिक कदम के पीछे की वजहों को साझा किया। उन्होंने गठबंधन की मौजूदा स्थिति और सीटों के गणित को मीडिया के सामने रखा।

जीतने के लिए 28 विधायकों की जरूरत, एनडीए के पास केवल 24

बाबूलाल मरांडी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस वक्त एनडीए गठबंधन के पास कुल 24 विधायक हैं। जबकि चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए न्यूनतम 28 विधायकों के संख्या बल की आवश्यकता है। आवश्यक आंकड़े से 4 विधायक कम होने की वजह से गठबंधन ने यह कदम उठाया है।

उन्होंने आगे कहा कि जब गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल उपलब्ध नहीं है, तो ऐसी स्थिति में सभी ने मिलकर यह तय किया कि निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया जाए। इसी रणनीति के तहत परिमल नाथवाणी को समर्थन देने का फैसला किया गया है।

संख्या बल होता तो दल विचार-मंथन कर उतारता अपना प्रत्याशी

पत्रकारों से चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने यह भी साफ किया कि अगर एनडीए के पास जीत के लिए पूरी संख्या होती, तो दल के भीतर गहराई से विचार-मंथन किया जाता। उसके बाद गठबंधन किसी को अपना आधिकारिक प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारता।

चूंकि वर्तमान परिस्थितियों में गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या उपलब्ध नहीं है, इसलिए एनडीए ने स्वतंत्र उम्मीदवार परिमल नाथवाणी के पक्ष में जाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

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