रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने 10 जून 2026 को 8.86 एकड़ जमीन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी राजकुमार पाहन और विनोद कुमार सिंह की डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया। इस अदालती फैसले के बाद अब दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप गठन (फ्रेमिंग ऑफ चार्ज) और आगे के ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
पीएमएलए अदालत से आरोपियों को लगा बड़ा झटका
झारखंड के चर्चित 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। रांची स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष पीएमएलए अदालत ने जमीन के रैयत राजकुमार पाहन और आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह की डिस्चार्ज याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत मंथन लाइव न्यूज (Bharat Manthan Live News) को मिली जानकारी के अनुसार, कोर्ट द्वारा याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद अब दोनों आरोपियों पर कानूनी शिकंजा और कड़ा होगा।
हेमंत सोरेन की याचिका भी हो चुकी है खारिज
उल्लेखनीय है कि इस जमीन घोटाला मामले में अदालत का यह कोई पहला कड़ा फैसला नहीं है। इससे पहले 8 जून को इसी विशेष अदालत ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका को भी खारिज कर दिया था। राजकुमार पाहन और विनोद कुमार सिंह की याचिकाएं खारिज होने के बाद अब इस पूरे मामले में नामजद सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप गठन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने की संभावना है।
साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने लिया फैसला
मामले से जुड़े आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में नामजद कई आरोपियों ने अदालत के समक्ष खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए डिस्चार्ज याचिका दाखिल की थी। आरोपियों ने कोर्ट से खुद को इस केस से मुक्त करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, पीएमएलए अदालत ने मामले में उपलब्ध पुख्ता साक्ष्यों और जांच एजेंसी की रिपोर्ट को आधार मानते हुए इन याचिकाओं को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।
प्रवर्तन निदेशालय ने की है मामले की गहन जांच
यह पूरा विवाद रांची की 8.86 एकड़ जमीन के कथित फर्जीवाड़े और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है। जांच प्रक्रिया के दौरान ईडी ने कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके साथ ही आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह सहित कई अन्य लोगों को समन जारी कर कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया था और उनसे लंबी पूछताछ की थी।
मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी और चार्जशीट का घटनाक्रम
- लगातार 10 समन: ईडी ने जांच के सिलसिले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए लगातार 10 समन जारी किए थे।
- मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी: लगातार समन के बाद 31 जनवरी 2024 को लंबी पूछताछ के पश्चात ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था।
- हाईकोर्ट से जमानत: गिरफ्तारी के बाद करीब पांच महीने जेल में बिताने पर 28 जून 2024 को उन्हें झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
इस व्यापक जांच अभियान के दौरान ईडी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता अंतू तिर्की समेत कई प्रमुख जमीन कारोबारियों और संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया था। जांच को पूरा करने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने करीब डेढ़ दर्जन आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की है, जिसमें राजकुमार पाहन और विनोद कुमार सिंह भी चार्जशीटेड आरोपी के रूप में नामजद हैं।
