जामताड़ा जिले के शहरबेड़ा गांव में शुक्रवार रात समय पर 108 एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने के कारण एक मरीज को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया रखकर सदर अस्पताल ले जाना पड़ा। अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज मोनू टुडू की मौत हो गई, जिसके बाद सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
समय पर नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस सेवा
जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। जामताड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गोपालपुर पंचायत के शहरबेड़ा गांव के निवासी मोनू टुडू की शुक्रवार, 12 जून 2026 की रात को अचानक तबीयत बेहद खराब हो गई। परिजनों के मुताबिक, मरीज की हालत गंभीर होती देख उन्होंने तुरंत सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा से कई बार संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची।
जब काफी इंतजार के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई सरकारी सहायता या एंबुलेंस नहीं मिली, तो परिजनों और ग्रामीणों ने मिलकर मोनू टुडू को किसी भी तरह अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया रखकर ले जाना पड़ा अस्पताल
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, गांव में एंबुलेंस न होने के कारण ग्रामीणों ने वहां मौजूद एक ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम किया। ट्रैक्टर पर ही एक खटिया रखी गई और उस पर बीमार मोनू टुडू को लिटाकर किसी तरह जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, परिवहन के समुचित साधन न होने और रास्ता तय करने में समय लगने के कारण अस्पताल पहुंचने में काफी देर हो चुकी थी। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज को भर्ती कर तुरंत इलाज शुरू किया, लेकिन उपचार के दौरान ही मोनू टुडू ने दम तोड़ दिया।
सिविल सर्जन ने दिए मामले की जांच के आदेश
इस दर्दनाक घटना के बाद से शहरबेड़ा गांव के स्थानीय निवासियों और परिजनों में स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जामताड़ा के सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाया है और तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले की गहनता से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान तकनीकी तौर पर यह भी पूरी तरह साफ किया जाएगा कि परिजनों द्वारा 108 एंबुलेंस सेवा के कंट्रोल रूम में फोन किया गया था या नहीं, और यदि फोन किया गया था तो एंबुलेंस मौके पर क्यों नहीं पहुंची।
