नयी दिल्ली में विश्लेषकों के अनुसार, आगामी सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत पर बाजार की नजर रहेगी, जहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरानी अधिकारियों के साथ वार्ता का नेतृत्व करेंगे।
वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों से तय होगा सराफा बाजार का रुख
आगामी सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों की चाल मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता, कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों से निर्धारित होगी। बाजार विश्लेषकों ने यह अनुमान व्यक्त किया है। इस दौरान निवेशकों की निगाहें स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी रहेंगी।
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, स्विट्जरलैंड में होने वाली इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा किए जाने की उम्मीद है, जहां वे ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। यह चर्चा पिछले सप्ताह तैयार हुई उस रूपरेखा को आगे बढ़ाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी तनाव को समाप्त करना है। विश्लेषकों का मानना है कि इन वार्ताओं का सीधा असर निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा, जिससे बहुमूल्य धातुओं की कीमतें प्रभावित होंगी। आगामी शुक्रवार को सुबह के सत्र में मुहर्रम के अवसर पर घरेलू जिंस बाजार बंद रहेंगे।
सीमित दायरे में बना हुआ है सोने-चांदी का रुझान
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी – जिंस एवं मुद्रा शोध के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने बताया कि सोने और चांदी का रुझान वर्तमान में एक सीमित दायरे के भीतर बना हुआ है। बाजार पूरी तरह से अमेरिका-ईरान वार्ता और विशेष तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से होने वाली कच्चे तेल व एलएनजी की आपूर्ति पर नजर रखे हुए है। बीते सप्ताह मजबूत होते रुपये और कम होती मांग के चलते बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी।
‘मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज’ (MCX) पर सोने का वायदा भाव 3,325 रुपये या 2.2 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इसी तरह, चांदी की कीमत भी 13,001 रुपये या 5.3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई।
मजबूत रुपये और फेडरल रिजर्व के रुख से बना दबाव
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष, शोध विश्लेषक जिंस एवं मुद्रा, जतिन त्रिवेदी ने जानकारी दी कि सोना पूरे सप्ताह दबाव की स्थिति में देखा गया। ऊर्जा की कीमतों में आई कमी, मजबूत भारतीय रुपये और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के कारण कीमतों पर यह दबाव बना रहा। मजबूत रुपया घरेलू बाजार में आयातित सोने की लागत को घटा देता है, जिससे स्थानीय कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
वैश्विक मोर्चे पर, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का वायदा भाव आंशिक बढ़त के साथ 4,245.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 2.03 प्रतिशत टूटकर 66.32 डॉलर प्रति औंस पर रही। प्रणव मेर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर सूचकांक के लगभग 100.60 के आसपास बंद होने और मजबूत डॉलर के बने रहने से सोने-चांदी पर दबाव देखा गया। हालांकि, रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़ी चिंताओं ने सोने को निचली कीमतों पर कुछ सहारा दिया, लेकिन निवेशकों का मुख्य ध्यान पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर ही केंद्रित रहा।
