देवघर के अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलीट रोहित कुमार चला रहे चाय की दुकान

झारखंड के देवघर में चाय की दुकान चलाते अंतरराष्ट्रीय शॉटपुट पदक विजेता पैरा-एथलीट रोहित कुमार।

झारखंड के देवघर जिले के अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलीट और शॉटपुट पदक विजेता रोहित कुमार अपने परिवार के भरण-पोषण और खेल के खर्चों को पूरा करने के लिए चाय की दुकान चलाने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी नौकरी, वित्तीय सहायता और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बाद भी जीवन यापन का संघर्ष झारखंड के देवघर जिले के निवासी पैरा-एथलीट रोहित कुमार ने शॉटपुट स्पर्धा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। हितेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, खेल के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद भी उनकी घरेलू स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। अपने परिवार की वित्तीय जरूरतों और खेल जारी रखने के खर्चों को पूरा करने के लिए वे चाय की दुकान चलाने को विवश हैं।

चीन में जीता था कांस्य पदक और 2026 में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान रोहित कुमार ने चीन के हांगझाउ में आयोजित 2022 एशियन पैरा गेम्स की शॉटपुट प्रतियोगिता में 14.56 मीटर थ्रो फेंककर कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2024 में ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीता और वर्ष 2026 में शॉटपुट स्पर्धा में पुनः अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त की। इन सभी उपलब्धियों के बाद भी उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन नहीं मिल पाए हैं।

संसाधनों के अभाव में इंटरनेट से ली खेल की ट्रेनिंग रोहित कुमार ने बताया कि उन्होंने खेल से जुड़ी अधिकांश बारीकियां और जानकारी इंटरनेट के माध्यम से हासिल की हैं। राज्य स्तर पर उचित कोचिंग और पर्याप्त उपकरणों के बिना ही उन्होंने प्रतियोगिताओं में भाग लिया और भारत का प्रतिनिधित्व किया। पारिवारिक आय सीमित होने के कारण उनके लिए खेल यात्रा को जारी रखना बेहद कठिन होता जा रहा है।

सरकारी नौकरी और सहायता की लगाई गुहार रोहित की मां एक छोटी दुकान चलाती हैं और उनके पिता छोटा-मोटा काम करते हैं। सीमित पारिवारिक आय के कारण चाय बेचकर मिलने वाले पैसे से वे परिवार के खर्च में योगदान देते हैं और खेल से जुड़ी जरूरतें पूरी करते हैं। उन्होंने सरकार से नौकरी, बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने की अपील की है। हाल ही में बिहार स्पोर्ट्स अथॉरिटी ने उन्हें सम्मानित किया था, लेकिन वे अपने गृह राज्य झारखंड में उचित सम्मान और मदद का इंतजार कर रहे हैं।

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