प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक चर्चाओं में ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) के शामिल होने से बहुत पहले ही इस द्वीप राष्ट्र ने इसका नेतृत्व किया था। उन्होंने हिंद महासागर को दोनों देशों का साझा घर बताते हुए इसकी सुरक्षा और समृद्धि को एक संयुक्त जिम्मेदारी बताया।
पीएम मोदी का सेशेल्स दौरा, नेशनल असेंबली में दिया विशेष संबोधन
नई दिल्ली/सेशेल्स: समुद्री क्षेत्र में सेशेल्स के अत्यधिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) को लेकर चर्चा शुरू होने से काफी पहले ही यह द्वीप राष्ट्र इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी आधिकारिक राजकीय यात्रा के हिस्से के रूप में सेशेल्स की नेशनल असेंबली में एक विशेष संबोधन के दौरान यह बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में भी हिस्सा लिया। नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब लोग मानचित्र को देखते हैं, तो वे सेशेल्स को हिंद महासागर में द्वीपों के एक समूह के रूप में देख सकते हैं, लेकिन भारत इसे कहीं अधिक महान रूप में देखता है।
सेशेल्स एक छोटा द्वीप नहीं, बल्कि विशाल महासागरीय देश
प्रधानमंत्री ने सेशेल्स के भौगोलिक और रणनीतिक विस्तार पर चर्चा करते हुए कहा कि सेशेल्स एक ऐसा देश है जिसकी क्षितिज रेखाएं उसके तटों से कहीं आगे तक फैली हुई हैं। उन्होंने बताया कि सेशेल्स का समुद्री क्षेत्र लगभग 1.4 मिलियन (14 लाख) वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यही विशालता सेशेल्स को एक छोटा द्वीप राज्य नहीं, बल्कि एक बड़ा महासागरीय देश बनाती है।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और ब्लू बॉन्ड पर दिया जोर
भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस द्वीप राष्ट्र ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने और ‘ब्लू बॉन्ड’ जैसे नए नवाचारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण वैश्विक संवादों को आकार देने में मदद की है। उन्होंने प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए सेशेल्स के प्रयासों की सराहना की।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि प्राकृतिक आश्चर्यों की रक्षा और संरक्षण के लिए सेशेल्स द्वारा किए जा रहे प्रयास हमारी उस वृहद विचारधारा को दर्शाते हैं, जिसके तहत मानवता को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भावना भारत में भी गहराई से गूंजती है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों से मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि आने वाली पीढ़ियों को ऐसे महासागर विरासत में मिलें जो आज की तुलना में अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध हों।
