बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहुआ गांव निवासी ‘मैंगो मैन’ राम किशोर सिंह ने आम की दो नई किस्में ‘नागेंद्र भोग’ और ‘रामजसी’ विकसित की हैं। तुड़ाई के बाद 12 से 15 दिनों तक ताजा रहने वाली इन विशाल किस्मों ने बागवानी विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है, जिसके बाद आईसीएआर ने पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुजफ्फरपुर के ‘मैंगो मैन’ का कमाल, विकसित की आम की दो अनूठी और विशाल किस्में
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत रहुआ गांव के रहने वाले 50-वर्षीय राम किशोर सिंह ने आम की दो नई अनूठी किस्में विकसित कर कृषि क्षेत्र में अपनी एक खास पहचान बना ली है। उनके द्वारा तैयार की गई ‘नागेंद्र भोग’ और ‘रामजसी’ नामक किस्में तुड़ाई के बाद भी करीब 12 से 15 दिनों तक पूरी तरह ताजी बनी रहती हैं। इन किस्मों में से ‘नागेंद्र भोग’ का महज एक फल लगभग 700 से 800 ग्राम तक का होता है, जो सामान्य आम की तुलना में करीब चार गुना बड़ा और फुटबॉल के मुकाबले लगभग दोगुना भारी है।
साधारण जीवन जीने वाले राम किशोर सिंह ने इन दोनों नई किस्मों का नामकरण अपने माता और पिता के नाम पर किया है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता के बाद लखनऊ समेत देश के कई प्रतिष्ठित बागवानी संस्थानों की वैज्ञानिक टीमें उनकी नर्सरी का दौरा कर रही हैं। विशेषज्ञ इन अनूठी किस्मों की विशेषताओं का अध्ययन कर रहे हैं और उनके विशिष्ट गुणों को दस्तावेजी रूप देने में जुटे हैं।
पीपीवीएंडएफआर अधिनियम के तहत पंजीकरण की तैयारी
सरकारी कृषि संस्थानों ने हाल ही में इन विशिष्ट फलों के नमूने संकलित कर गहन परीक्षण के लिए भेजे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन नई किस्मों को ‘पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम’ (PPV&FR Act) के तहत आधिकारिक रूप से ‘किसान द्वारा विकसित किस्म’ के रूप में दर्ज कराना है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने ‘रामजसी’ किस्म के पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज आगे भेज दिए हैं, जबकि ‘नागेंद्र भोग’ किस्म का मूल्यांकन कार्य अभी जारी है।
आठ साल की कड़ी मेहनत का परिणाम
भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, राम किशोर सिंह ने आज से करीब आठ साल पहले इन दोनों नई किस्मों पर अपना कृषि प्रयोग शुरू किया था। हालांकि, उन्होंने इसे विकसित करने की अपनी विशेष तकनीक को सार्वजनिक नहीं किया है। उनका कहना है कि यह उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम है।
उनकी नर्सरी में इन दोनों किस्मों के पेड़ों की अधिकतम ऊँचाई लगभग 15 फुट तक ही रहती है, जिसके कारण ये पारंपरिक आम के बड़े पेड़ों की तुलना में बेहद कम जगह लेते हैं। उत्पादकता के मामले में भी ये पेड़ काफी उन्नत हैं और एक सीजन में एक पेड़ से लगभग 100 से 150 किलोग्राम तक आम की उपज प्राप्त की जा सकती है।
व्यावसायिक बिक्री के बजाय पौधे तैयार करने पर जोर
राम किशोर सिंह इन विशेष आम के फलों की सीधे बाजार में व्यावसायिक बिक्री नहीं करते हैं। इसके बजाय, वे अपनी नर्सरी में इनके पौधे तैयार कर इच्छुक किसानों और बागवानों को उपलब्ध कराते हैं। मीडिया में इस खबर के आने के बाद से अब तक उनके पास से लगभग 100 पौधों की बिक्री हो चुकी है, जहां उन्होंने प्रत्येक पौधे की कीमत करीब 300 रुपये निर्धारित की है।
भले ही इस कार्य से उन्हें अभी सीमित आर्थिक लाभ मिल रहा हो, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित करना और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है। आईसीएआर के नियमों के मुताबिक, यदि इन किस्मों को भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर फैलाया जाता है, तो इसके प्रयोग से होने वाले कुल मुनाफे का 20 प्रतिशत हिस्सा विकसितकर्ता यानी राम किशोर सिंह को रॉयल्टी के रूप में दिया जा सकता है।
