प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े बताए जा रहे कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने इस तलाशी अभियान के दौरान संदिग्ध बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये की भारी राशि को फ्रीज कर दिया है।
केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में कोलकाता सहित कई ठिकानों पर छापेमारी
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कथित मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच एजेंसी की टीमों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की मुस्तैद मौजूदगी में कोलकाता समेत राज्य के कई अलग-अलग इलाकों में एक साथ व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत टीएमसी से जुड़े बताए जा रहे संदिग्ध बैंक खातों को खंगालते हुए उनमें जमा 440 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया है।
इस बड़ी वित्तीय कार्रवाई के बाद से राज्य के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। ईडी वर्तमान में उन सभी बैंक खातों की गहनता से स्क्रूटनी कर रही है, जिनमें अचानक बड़ी मात्रा में धनराशि जमा होने की गोपनीय जानकारी सामने आई थी। एजेंसी के इस एक्शन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी रकम किन स्रोतों से आई, इसका आगे कहाँ उपयोग हुआ और क्या इसमें मनी लॉन्ड्रिंग या किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता शामिल है।
निजी एविएशन कंपनी भी आई ईडी जांच के दायरे में
इस पूरे मामले की तफ्तीश के दौरान एक निजी एविएशन कंपनी का नाम भी प्रमुखता से उभरकर सामने आया है। कंपनी पर आरोप है कि यह पहले टीएमसी के कुछ बेहद वरिष्ठ नेताओं को चार्टर्ड विमान की सेवाएं उपलब्ध कराती थी। हालांकि, नियमों के मुताबिक किसी राजनेता द्वारा चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल करना अपने आप में किसी वित्तीय अनियमितता का सीधा प्रमाण नहीं माना जाता है। इसके बावजूद, ईडी इस वक्त कंपनी से जुड़े तमाम वित्तीय लेन-देन, फंड ट्रांसफर और उसके राजनीतिक संबंधों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ था पुराना विवाद
भारत मंथन Live News को मिली जानकारी के अनुसार, इन विवादित बैंक खातों को लेकर विवाद राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद ही शुरू हो गया था। उस समय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और पूर्व मंत्री अरुण विश्वास ने संबंधित बैंक को एक आधिकारिक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने इन खातों में जमा राशि के संभावित दुरुपयोग की गहरी आशंका व्यक्त की थी।
इसके बाद, पार्टी का दामन छोड़ चुके कुछ पूर्व विधायकों ने भी स्थानीय पुलिस में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन खातों में जमा की गई मोटी रकम कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के माध्यम से जुटाई गई हो सकती है।
पुलिस एक्शन के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा था मामला
विभिन्न स्तरों से शिकायतें मिलने के बाद प्रारंभिक कार्रवाई के तौर पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने इन संदिग्ध खातों पर तत्काल प्रभाव से ‘डेबिट फ्रीज’ लगा दिया था, जिससे उस समय भी राशि की किसी भी तरह की निकासी पर पूरी तरह रोक लग गई थी। इस पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ पीड़ित पक्ष द्वारा कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया था, लेकिन अदालत की तरफ से उन्हें कोई त्वरित राहत नहीं मिल सकी थी।
केंद्रीय कार्रवाई पर बंगाल में गरमाई सियासत
ईडी की इस ताबड़तोड़ छापेमारी और करोड़ों रुपये फ्रीज किए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी का दौर चरम पर पहुंच गया है। जहां एक तरफ विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की एक बेहद जरूरी और बड़ी कार्रवाई बताकर स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने पलटवार किया है। टीएमसी का सीधा आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग सिर्फ उनके राजनीतिक विरोधियों को जानबूझकर निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। फिलहाल, ईडी की टीमें पूरे फंड फ्लो, पैसों के आने-जाने के रास्तों और स्रोतों की कड़ाई से जांच कर रही हैं।
