अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी के नेतृत्व में लोकभवन पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल सह कुलाधिपति को झारखंड की उच्च शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों, पाठ्यक्रमों की बंदी और जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियों के खिलाफ 8 सूत्री मांग पत्र सौंपकर त्वरित हस्तक्षेप की अपील की।
उच्च शिक्षा में विसंगतियों और जेपीएससी परिणाम के खिलाफ अभाविप का मोर्चा
रांची: झारखंड की उच्च शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों, पाठ्यक्रमों को बंद किए जाने और परीक्षा प्रणालियों में भारी गड़बड़ियों के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने अपना विरोध तेज कर दिया है। सोमवार को अभाविप का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी के नेतृत्व में लोकभवन पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल सह कुलाधिपति को 8 सूत्री मांग पत्र सौंपकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लिए जा रहे अव्यावहारिक फैसलों के कारण ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के सामने शिक्षा से वंचित होने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल का ध्यान नई क्लस्टर कॉलेज व्यवस्था और विषयों के केंद्रीकरण से होने वाले दुष्प्रभावों की ओर मुख्य रूप से आकृष्ट कराया। छात्र नेताओं ने बताया कि झारखंड के महाविद्यालयों में स्नातक (यूजी) की सीटों में भारी कटौती कर दी गई है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई को बंद किया जा रहा है। उनका तर्क है कि यदि किसी विषय की पढ़ाई केवल एक ही क्लस्टर कॉलेज तक सीमित कर दी जाएगी, तो सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब विद्यार्थियों के लिए दूसरे शहरों में रहकर पढ़ाई करना आर्थिक रूप से पूरी तरह असंभव हो जाएगा। इससे राज्य के सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में भारी गिरावट आएगी और ड्रॉपआउट की दर बढ़ जाएगी, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का मूल उद्देश्य ही ध्वस्त हो जाएगा।
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बंद करने और फीस वृद्धि का विरोध
भारत मंथन लाइव न्यूज़ के अनुसार, अभाविप ने बीबीए, बीसीए, बायो टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर साइंस जैसे रोजगारपरक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बंद करने के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। इसके साथ ही, बीएड जैसे शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को ‘स्वनिर्पोजित’ (Self-Financed) श्रेणी में रखकर फीस बढ़ाने के फैसले की भी तीखी आलोचना की गई है। सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कार्यप्रणाली और हाल ही में जारी 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों में व्यापक भ्रष्टाचार व अपारदर्शिता का मुद्दा भी प्रखरता से उठाया।
JPSC प्रारंभिक परीक्षा परिणाम पर उठाए गंभीर सवाल
प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने कहा कि जेपीएससी ने अपनी ही एसओपी (SOP) का स्पष्ट उल्लंघन किया है। आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए नियमानुसार मिलने वाले 90 दिनों का अनिवार्य समय अभ्यर्थियों को नहीं दिया। इसके अतिरिक्त, नियमों के तहत कुल 103 रिक्तियों के विरुद्ध जहां 1,545 अभ्यर्थियों का चयन किया जाना चाहिए था, वहीं आयोग ने बिना किसी तार्किक व सार्वजनिक कट-ऑफ मार्क्स की घोषणा किए 2,200 से अधिक अभ्यर्थियों को पास कर दिया है, जिसने पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया है।
“मॉडल उत्तर कुंजियों में बार-बार त्रुटियां रहना, एक ही परीक्षा केंद्र से लगातार रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों का सफल होना और बिना सभी सदस्यों के हस्ताक्षर के परिणाम जारी करना आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।” – प्रकाश टूटी, प्रदेश मंत्री, अभाविप
अभाविप ने इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराने और जांच पूरी होने तक मुख्य परीक्षा को स्थगित रखने की प्रमुख मांग की है।
