रांची रिम्स में HLA-B27 जांच सिर्फ 475 रुपये में शुरू, निजी लैब से 90% तक बचत

रांची रिम्स के लैब मेडिसिन विभाग की अत्याधुनिक लैब में रखी गई RT-PCR मशीन जिसपर HLA-B27 जांच की जाती है।

रांची के रिम्स अस्पताल में जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस के मरीजों के लिए HLA-B27 जांच की सुविधा मात्र 475 रुपये में शुरू की गई है, जिससे निजी लैब के मुकाबले मरीजों को 90 प्रतिशत तक की बड़ी बचत होगी। लैब मेडिसिन विभाग में अत्याधुनिक RT-PCR मशीन द्वारा की जाने वाली इस जांच की रिपोर्ट मरीजों को महज डेढ़ घंटे में मिल जाएगी।

रांची रिम्स में बेहद कम कीमत पर HLA-B27 जांच सुविधा शुरू

झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) से जोड़ों के दर्द, शरीर में लगातार जकड़न और अर्थराइटिस (गठिया) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, रिम्स रांची में अब HLA-B27 जांच की सुविधा अत्यंत किफायती दर पर उपलब्ध करा दी गई है। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।

अस्पताल प्रशासन से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रिम्स में इस विशेष चिकित्सा जांच के लिए मरीजों को सिर्फ 475 रुपये का भुगतान करना होगा। यही जांच यदि कोई मरीज बाहर किसी निजी लैब से करवाता है, तो उसे करीब 4,000 रुपये से लेकर 4,500 रुपये तक की भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है। इस लिहाज से रिम्स में जांच कराने पर मरीजों को सीधे तौर पर 90 प्रतिशत तक की आर्थिक बचत हासिल होगी।

डेढ़ घंटे में मिलेगी रिपोर्ट, बिहार-झारखंड का इकलौता सरकारी संस्थान

अत्याधुनिक RT-PCR मशीन से हो रही जांच

रिम्स के लैब मेडिसिन विभाग में पिछले तीन महीनों से अत्याधुनिक RT-PCR मशीन के जरिए यह जांच सफलतापूर्वक की जा रही है। मरीज का ब्लड सैंपल सीधे अस्पताल की अपनी इन-हाउस लैब में ही जांचा जाता है, जिससे बाहरी लैब पर निर्भरता खत्म हो गई है। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, ब्लड सैंपल लेने से लेकर अंतिम रिपोर्ट तैयार होने की पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है।

स्थानीय स्तर पर सैंपल की प्रोसेसिंग

अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि फिलहाल बिहार और झारखंड के तमाम सरकारी मेडिकल कॉलेजों में से यह अत्याधुनिक सुविधा सिर्फ और सिर्फ रिम्स रांची में ही उपलब्ध है। जहां एक तरफ निजी पैथोलॉजी लैब्स में अक्सर इस जांच के सैंपल को कलेक्ट करके दूसरे बड़े महानगरों में भेजा जाता है (जिससे रिपोर्ट आने में कई दिनों का समय लगता है), वहीं रिम्स में पूरी जांच प्रक्रिया अस्पताल परिसर की ही लैब के भीतर संपन्न कर ली जाती है।

ऑटोइम्यून बीमारियों और अर्थराइटिस की सटीक पहचान में मददगार

चिकित्सकों के अनुसार, HLA-B27 जांच मुख्य रूप से अर्थराइटिस (गठिया) और कई अन्य जटिल ऑटोइम्यून बीमारियों की सटीक पहचान करने में बेहद मददगार साबित होती है। यदि किसी मरीज की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टरों को उसकी रीढ़ की हड्डी, शरीर के विभिन्न जोड़ों और आंखों में होने वाली सूजन जैसी समस्याओं के मूल कारणों को गहराई से समझने में काफी आसानी होती है। इसके विपरीत, यदि जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो शरीर में इस तरह की ऑटोइम्यून बीमारियों की होने की संभावना को कम माना जाता है।

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