27 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही ओलिवर फोरन माउंट एवरेस्ट के लिए एक अनोखा ‘सी-टू-समिट’ अभियान चला रहे हैं। बंगाल की खाड़ी से 1,150 किलोमीटर साइकिल चलाने के बाद, अब वे 8,849 मीटर ऊंची चोटी पर चढ़ाई कर रहे हैं। फोरन का लक्ष्य 60 दिनों में इस यात्रा को पूरा कर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए फंड जुटाना है।
क्या है ‘सी-टू-समिट’ चुनौती?
ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही ओलिवर फोरन ने माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए एक कठिन ‘सी-टू-समिट’ (समुद्र से शिखर तक) यात्रा शुरू की है। अपनी इस अनोखी यात्रा की शुरुआत उन्होंने भारत की बंगाल की खाड़ी से की, जहां से उन्होंने 1,150 किलोमीटर (715 मील) की दूरी साइकिल से तय की। अब वे 8,849 मीटर (29,032 फीट) ऊंची चोटी तक पहुंचने के लिए ट्रेकिंग कर रहे हैं। फोरन का लक्ष्य इस पूरी यात्रा को मात्र 60 दिनों में पूरा करके नया रिकॉर्ड बनाना है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनूठी मुहिम
यह अभियान केवल एक रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा मानवीय उद्देश्य भी है। पूर्व रियल एस्टेट एजेंट ओलिवर फोरन इस अभियान के जरिए युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए 200,000 डॉलर जुटाना चाहते हैं। वे ऑस्ट्रेलिया के ‘यूटर्न’ संगठन के साथ मिलकर युवाओं के लिए एक मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
फोरन की यह मुहिम उनकी अपनी निजी कहानी से जुड़ी है। अपनी मां को ब्रेन कैंसर के कारण खोने के बाद, उन्होंने जिस गहरे दुख और मानसिक संघर्ष का सामना किया, उसने उन्हें दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित किया। वे उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनना चाहते हैं जो जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
तैयारी और दृढ़ संकल्प
ऊंचाई के लिए खुद को तैयार करने के लिए, फोरन ने पिछले छह महीनों से शारीरिक सहनशक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम, साइकिलिंग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज पर ध्यान केंद्रित किया है। उनके लीड गाइड और अभियान आयोजक, एजीए एडवेंचर्स के गेल्जे शेरपा ने बताया कि आधुनिक सुविधाओं के युग में फोरन का केवल मानवीय शक्ति (Human Power) का उपयोग करना बहुत बड़ी बात है।
अपनी चढ़ाई के दौरान, फोरन को अपनी दिवंगत मां की यादें सहारा देती हैं। भारत मंथन लाइव न्यूज उनके इस साहसिक और प्रेरणादायक अभियान की प्रगति पर लगातार नज़र रखेगा।
