रांची: IFS राजीव लोचन बख्शी के कार्यकाल की SIT जांच हो, बाबूलाल मरांडी का CM को पत्र

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर IFS अधिकारी की SIT जांच की मांग करते नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी।

रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी राजीव लोचन बख्शी के पूरे कार्यकाल की एसआईटी जांच, एफआईआर और फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। एजी ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने रांची डीएफओ रहते हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय गबन और गड़बड़ियों का आरोप लगाया है।

बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने झारखंड कैडर के चर्चित आईएफएस (IFS) अधिकारी राजीव लोचन बख्शी के संपूर्ण कार्यकाल की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग उठाई है।

AG ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देकर वित्तीय गबन के आरोप

बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कहा कि राजीव लोचन बख्शी के वर्ष 2013 से 2018 के दौरान रांची वन प्रमंडल के डीएफओ पद पर रहते हुए किए गए घोटालों को प्रधान महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट ने उजागर कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण को लेकर वे पूर्व में राज्यपाल और एसीबी के अपर पुलिस महानिदेशक को भी सूचित कर चुके हैं।

जाली मस्टर रोल से ₹1.03 करोड़ के फर्जी भुगतान का दावा

पत्र में महालेखाकार की निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि अप्रैल 2016 से मार्च 2019 के बीच मात्र 95 मस्टर रोल्स की जांच में ₹1.0383 करोड़ का फर्जी भुगतान सामने आया। मस्टर रोल्स पर मजदूरों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नहीं थे, और ‘व्हाइटनर’ व ‘इरेजर’ का इस्तेमाल कर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई तथा भुगतान नकद दिखाया गया।

वन भूमि अपयोजन से राजस्व का नुकसान

मरांडी के अनुसार, वर्ष 2013-14 में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रस्तावों को नियम विरुद्ध 8 छोटे प्रस्तावों में बांट दिया गया ताकि सरकार की पूर्वानुमति न लेनी पड़े। अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर 7.35 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन का आदेश दिया गया, जिससे राज्य सरकार को कम से कम ₹46.01 लाख की NPV राशि का नुकसान हुआ।

कैंपा (CAMPA) मद के ₹8.53 करोड़ का हिसाब गायब

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 2014-15 में विभिन्न रेंजरों को दिए गए ₹8,53,40,488 के भारी अग्रिम का लेखा-जोखा ऑडिट दल से जानबूझकर छिपाया गया। इस राशि के उपयोग का आज तक कोई भौतिक सत्यापन नहीं हो सका है।

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