गुमला जिले में 108 एंबुलेंस सेवा की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी के अनुसार जिले में उपलब्ध 17 एंबुलेंस में से केवल चार ही रांची तक मरीजों को ले जाने में सक्षम हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और मरीजों ने भी सेवा में कई समस्याओं का आरोप लगाया है।
गुमला में 108 एंबुलेंस सेवा की स्थिति पर उठे सवाल
गुमला जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। जिले में संचालित एंबुलेंस सेवाओं की कार्यप्रणाली को लेकर स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मरीजों की ओर से विभिन्न दावे किए गए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी के अनुसार, जिले में 108 सेवा के तहत कुल 17 एंबुलेंस उपलब्ध हैं।
केवल चार एंबुलेंस रांची तक मरीज ले जाने में सक्षम: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन ने बताया कि उपलब्ध 17 एंबुलेंस में से केवल चार एंबुलेंस ही ऐसी हैं जो रांची तक मरीजों को ले जाने में सक्षम हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 108 सेवा के टोल फ्री नंबर पर कॉल करने पर मिलने वाला रिस्पांस कई बार परेशानी का कारण बनता है।
ऑन रिकॉर्ड नौ एंबुलेंस सड़क पर संचालित
जानकारी के अनुसार, जिले में उपलब्ध 17 एंबुलेंस में से ऑन रिकॉर्ड नौ एंबुलेंस ही सड़क पर संचालित दिखाई दे रही हैं।
रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि संचालित एंबुलेंसों में भी ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने सेवा पर उठाए सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता मुख्तार आलम ने आरोप लगाया कि जिले में संचालित 108 एंबुलेंस सेवा आम लोगों को प्रभावी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस विषय को कई बार उठाया गया और स्वास्थ्य मंत्री से भी मुलाकात की गई, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
मरीज ने भी एंबुलेंस उपलब्ध होने में परेशानी बताई
सदर अस्पताल में भर्ती एक मरीज ने बताया कि उन्हें रांची रेफर किया गया है, लेकिन एंबुलेंस सेवा प्राप्त करने के लिए कई स्थानों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
उनके अनुसार, समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
एंबुलेंसों की स्थिति को लेकर कई दावे
संवाददाता द्वारा अस्पताल परिसर में खड़ी 108 एंबुलेंसों का निरीक्षण किए जाने के दौरान यह दावा किया गया कि कोई भी एंबुलेंस पूरी तरह कार्यशील स्थिति में नहीं दिखाई दी।
रिपोर्ट के अनुसार, कई एंबुलेंसों में ऑक्सीजन, मेडिकल उपकरण, आपातकालीन दवाएं, लाइट, सायरन और ब्लिंकर लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
स्टाफ ने भी रखी अपनी समस्याएं
नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कुछ स्टाफ ने दावा किया कि उन्हें पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। उनका यह भी कहना था कि वेतन में कटौती की जाती है तथा डीजल और वाहन मरम्मत जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
स्टाफ के अनुसार, वाहन में खराबी आने पर एजेंसी की ओर से समय पर ध्यान नहीं दिया जाता और कई बार मरम्मत की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ती है।
