राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पास

राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने वाला बिल पारित।

राज्यसभा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने से संबंधित विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में कहा कि जजों की संख्या में वृद्धि न्यायिक सुधारों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न्याय तक पहुंच में सुधार करना और लंबित मामलों को कम करना है।

Rajya Sabha Approves Bill To Increase Number Of Judges In Supreme Court

नई दिल्ली: राज्यसभा ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों के वाकआउट के बीच इसे पास कर दिया गया।

लोकसभा में पहले ही हो चुका है पारित

द सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जज) अमेंडमेंट बिल, 2026 अध्यादेश का स्थान लेगा। इसे लोकसभा द्वारा 3 अगस्त को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। मनी बिल होने के कारण इसे उच्च सदन द्वारा लोकसभा को वापस लौटा दिया गया है। चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

केस पेंडेंसी कम करने और क्षमता विस्तार की पहल

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जजों की स्वीकृत संख्या में बढ़ोतरी सरकार के उन न्यायिक सुधारों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य नागरिकों के लिए न्याय की पहुंच को सुलभ बनाना और अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करना है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में मामलों के दर्ज होने की दर में लगातार वृद्धि हुई है, जिसे देखते हुए न्यायिक क्षमता का विस्तार करना आवश्यक हो गया था।

सीजेआई के पत्र और संविधान पीठ का दिया हवाला

अध्यादेश के रास्ते पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने 11 मई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दैनिक आधार पर मामलों के बढ़ते आंकड़ों की जानकारी दी थी। मुख्य न्यायाधीश ने बताया था कि प्रतिवर्ष 10,000 मामलों का अंतर आ रहा है। उन्होंने कहा कि शबरीमला जैसे मामलों में जब 9 जजों की संविधान पीठ बैठती है, तो नियमित पीठों में जजों की संख्या कम हो जाती है, जिससे मुकदमों का निपटारा प्रभावित होता है।

1950 से अब तक जजों की संख्या का इतिहास

मेघवाल ने कहा कि वर्ष 1950 में जब उच्चतम न्यायालय ने काम करना शुरू किया था, तब मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 8 जज थे। बढ़ते कामकाज के अनुसार समय-समय पर जजों की संख्या बढ़ाई गई है। हालिया बढ़ोतरी से सबसे पुराने नागरिक और आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए समर्पित पीठों का गठन संभव हो सका है।

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