प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 सितंबर को बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या भारत में कानूनी प्रक्रिया से बच रहा है और बैंकों द्वारा कर्ज की वसूली कर लेने से उसके खिलाफ लगे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप खत्म नहीं होते।
बैंकों की संपत्ति वसूली से मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप खत्म नहीं
पूर्व शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत में स्पष्ट किया है कि माल्या भारत में कानूनी प्रक्रिया से लगातार भाग रहा है। ईडी के अनुसार, बैंकों द्वारा अपने बकाए की वसूली कर लेने से माल्या के खिलाफ दर्ज आपराधिक मनी लॉन्ड्रिंग के मामले खत्म या निरस्त नहीं हो जाते।
यह हलफनामा विजय माल्या द्वारा 2020 में दायर की गई उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिसमें उसने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को बंद करने की मांग की थी। माल्या का तर्क था कि बैंकों के साथ उसका विवाद कर्ज वसूली के बाद सुलझ चुका है।
₹14,131.6 करोड़ की संपत्ति बैंकों को सौंपी गई
ईडी ने अपने हलफनामे में जानकारी दी कि एसबीआई (SBI) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को 14,131.6 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियां सौंपी गई हैं। हालांकि, एजेंसी ने जोर देकर कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत संपत्तियों की बहाली वैध दावेदारों के लिए अपने नुकसान की भरपाई करने का एक वैधानिक तंत्र है, न कि आरोपी को राहत देने का जरिया।
जांच एजेंसी ने बताया कि माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़ कर चला गया था और बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था और नवंबर 2016 में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था।
3,500 करोड़ रुपये के गबन का मुख्य आरोप
अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारत लौटकर कानून के समक्ष आत्मसमर्पण करेगा, माल्या की ओर से टालमटोल वाले जवाब दिए गए। ईडी ने कहा कि आरोपी लगातार अदालती प्रक्रिया से बच रहा है और उसने खुद को सक्षम आपराधिक अदालत के क्षेत्राधिकार में प्रस्तुत नहीं किया है।
विजय माल्या पर अपनी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण में से कम से कम 3,500 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और हेराफेरी का आरोप है। ईडी ने 2016 में उसकी संपत्तियों को अनंतिम रूप से जब्त किया था, जिसके बाद 2019 में एक विशेष अदालत ने एसबीआई और अन्य बैंकों को ऋण वसूली के लिए यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड के शेयरों सहित अन्य संपत्तियों का उपयोग करने की अनुमति दी थी।
