बिहार सरकार ने राज्य की नदियों में गाद (सिल्ट) की समस्या से निपटने, जल प्रवाह को सुगम बनाने और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई नीति को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘बिहार जल संसाधन पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026’ को हरी झंडी दिखाई गई।
फरक्का बैराज और गंगा जल समझौते के विरोध के बीच बिहार में ‘सिल्ट मैनेजमेंट पॉलिसी 2026’ को मंजूरी
पटना। बिहार में नदियों के जल स्तर, गाद (सिल्ट) के जमाव और बाढ़ की गंभीर होती समस्याओं से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘बिहार जल संसाधन पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026’ (Bihar Water Resources Restoration and Sediment Management Policy, 2026) को मंजूरी दे दी गई है।
यह नीति ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का बैराज को हटाने और भारत-बांग्लादेश के बीच दिसंबर में नवीनीकृत होने वाले गंगा जल साझाकरण समझौते की समीक्षा को लेकर राज्य के राजनीतिक हलकों में मांग तेज हो गई है।
क्यों पड़ी इस नीति की आवश्यकता?
कैबिनेट सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित बारिश और औसत वर्षा में कमी देखी जा रही है। वहीं, बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगिक उपयोग और कृषि दबाव के कारण जल की मांग लगातार बढ़ रही है।
नदियों, जलाशयों और बैराजों में भारी मात्रा में सिल्ट जमा होने से उनकी जल-धारण क्षमता में काफी गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप सिंचाई क्षमता प्रभावित हो रही है और बाढ़ का खतरा व बारंबारता बढ़ रही है।
नीति के मुख्य उद्देश्य
- जल क्षमता में वृद्धि: नदियों और जल निकायों से गाद निकालकर उनकी प्राकृतिक जलधारण क्षमता को बहाल करना।
- अविरल प्रवाह: गंगा और अन्य प्रमुख नदियों में पानी के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करना।
- बाढ़ नियंत्रण: गाद प्रबंधन के जरिए मानसूनी सीजन में बाढ़ के जोखिम और प्रभाव को कम करना।
- जल सुरक्षा: भूजल और सतही जल पर बढ़ते दबाव को संतुलित करते हुए टिकाऊ विकास को गति देना।
