असम विधानसभा में UCC बिल 2026 पास, 3-6 महीने में लागू हो सकता है कानून

असम विधानसभा में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड UCC बिल 2026 पारित होने की जानकारी दी गई।

असम विधानसभा ने बुधवार को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्यपाल और राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद इस कानून को अगले तीन से छह महीने के भीतर पूरे राज्य में लागू किया जा सकता है।

असम विधानसभा से यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 को मिली हरी झंडी

गुवाहाटी: असम विधानसभा से एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। राज्य विधानसभा ने बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 2026 को सर्वसम्मति से अपनी मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक विधेयक के पारित होने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि अब इस बिल को आगामी विधायी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।

भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, विधानसभा से पास होने के बाद अब इस विधेयक को पहले राज्य के राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की संस्तुति मिलने के बाद इसे अंतिम संवैधानिक मंजूरी के लिए देश के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी के बाद 3 से 6 महीने में अमल की तैयारी

विधेयक के विधानसभा से पारित होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे राज्य के विकास और समानता के लिए एक “ऐतिहासिक कदम” करार दिया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण मोड़ पर पूरा सहयोग देने के लिए विधानसभा के सभी सदस्यों का खुले दिल से आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कानून के क्रियान्वयन की समय-सीमा पर बात करते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि राज्यपाल और राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद इस कानून को धरातल पर पूरी तरह लागू होने में लगभग 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि कानून लागू करने से पहले सभी आवश्यक संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद नियमों को किया जाएगा अधिसूचित

मुख्यमंत्री सरमा ने प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि कानून को धरातल पर सुचारू रूप से लागू करने से जुड़े कई नियम और उप-नियम पहले से ही तैयार कर लिए गए हैं। हालांकि, इन नियमों को पूरी तरह से लागू और अधिसूचित करने के लिए राज्य कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी की आवश्यकता होगी।

जैसे ही राष्ट्रपति भवन से इस विधेयक को अंतिम स्वीकृति प्राप्त होगी, वैसे ही सरकार इन तैयार नियमों को राज्य कैबिनेट के समक्ष रखेगी और कैबिनेट की मुहर लगते ही इन्हें अधिसूचित कर कानून को अमलीजामा पहना दिया जाएगा।

गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर पूरे देश में लंबे समय से एक बड़ी बहस चल रही है। जहां इसके समर्थक इसे सभी नागरिकों के लिए एक समान और पारदर्शी नागरिक व्यवस्था की दिशा में एक जरूरी कदम मान रहे हैं, वहीं इसके आलोचक इसे देश की सामाजिक और धार्मिक विविधताओं से जुड़ा हुआ एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताते रहे हैं।

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