BHU शोध: चावल की भूसी से कोलोरेक्टल कैंसर रोकथाम में मदद

BHU वैज्ञानिक द्वारा चावल की भूसी और कोलोरेक्टल कैंसर पर शोध से जुड़ा प्रयोगशाला दृश्य

वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैज्ञानिकों ने 26 अप्रैल को बताया कि चावल की भूसी (Rice Bran) कोलोरेक्टल कैंसर की रोकथाम में मदद कर सकती है। यह निष्कर्ष 2023 से चल रहे शोध और चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर सामने आया है।

BHU में चावल की भूसी पर कैंसर रोकथाम शोध

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), उत्तर प्रदेश के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि चावल की भूसी (Rice Bran) कोलोरेक्टल कैंसर (CRC) की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह शोध 2023 से जारी है और इसमें अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के साथ सहयोग किया गया है।

चूहों पर किए गए अध्ययन में मिले सकारात्मक परिणाम

BHU के जूलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर अखिलेंद्र मौर्य ने बताया कि यह अध्ययन चूहों पर किया गया, जिसमें पाया गया कि चावल की भूसी का सेवन आंतों के स्वास्थ्य में सुधार करता है।

शोध के अनुसार, इससे गट माइक्रोबायोटा और मेटाबोलाइट्स में सकारात्मक बदलाव होता है, जिससे सूजन और ट्यूमर का प्रभाव कम होता है।

कोलोरेक्टल कैंसर क्या है

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय (रेक्टम) में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि से होता है। यह अक्सर छोटे नॉन-कैंसरस ग्रोथ यानी पॉलीप्स से शुरू होता है।

शोध में बताया गया कि यह बीमारी लंबे समय तक आंतों की समस्याओं के बने रहने, अस्वस्थ आहार, मांस का अधिक सेवन, शराब का अत्यधिक उपयोग और शारीरिक गतिविधि की कमी से जुड़ी हो सकती है।

रिसर्च से जुड़े मुख्य निष्कर्ष

अखिलेंद्र मौर्य ने बताया कि चूहों पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि चावल की भूसी आहार में शामिल करने से कोलोरेक्टल कैंसर के विकास को रोकने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि यह शोध एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हो चुका है और इससे आगे के उपचार विकल्पों की दिशा में उम्मीद बढ़ी है।

आंतों के स्वास्थ्य में सुधार पर फोकस

शोध के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाली आंतों की समस्याएं कैंसर के विकास के लिए अनुकूल स्थिति बना सकती हैं।

चावल की भूसी के सेवन से सूजन कम होने और आंतों के मेटाबॉलिज्म में सुधार होने के संकेत मिले हैं, जिससे कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।

लक्षण और जांच

कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षणों में मल त्याग की आदतों में बदलाव, मल में खून, बिना कारण वजन घटना और लगातार थकान शामिल हैं।

इसकी पुष्टि कोलोनोस्कोपी के माध्यम से की जाती है, जिसमें प्री-कैंसरस पॉलीप्स को हटाया भी जा सकता है।

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