नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि 2021 से 30 जून तक विभिन्न देशों से कुल 615 प्राचीन वस्तुएं (पुरावशेष) भारत वापस लाई गई हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक लिखित सवाल के जवाब में संसद को यह जानकारी दी और बताया कि 2014 से अब तक कुल 655 पुरावशेष स्वदेश लाए जा चुके हैं।
संसद में गूंजा पुरावशेषों की वापसी का मुद्दा
संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में देश की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों और पुरावशेषों की विदेशों से वापसी का मुद्दा उठाया गया। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस संबंध में विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए।
2021 से 30 जून तक 615 प्राचीन वस्तुएं स्वदेश लौटीं
सरकार द्वारा साझा की गई तालिका के अनुसार, वर्ष 2021 से 30 जून तक विदेशों से कुल 615 पुरावशेष भारत वापस लाए गए हैं। वहीं वर्ष 2014 से 30 जून 2026 तक कुल 655 प्राचीन वस्तुएं स्वदेश वापस लाकर प्रमाणित की जा चुकी हैं। वर्ष 2021 में अमेरिका से 157 तथा कनाडा और ब्रिटेन से एक-एक पुरावशेष वापस लाया गया था।
चोरी हुई प्राचीन मूर्तियों का ब्योरा
केंद्रीय मंत्री से पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय संरक्षित स्मारकों से चोरी हुई प्राचीन वस्तुओं और उनकी बरामदगी के बारे में पूछा गया था। जारी आंकड़ों के अनुसार:
- वर्ष 2021: आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले में स्थित बिक्कावोलू के गोलिंगेश्वर मंदिर समूह से नंदी की मूर्ति चोरी हुई थी, जिसे सफलतापूर्वक बरामद कर लिया गया है।
- वर्ष 2022: कर्नाटक के मांड्या जिले में स्थित लक्ष्मीनरसिंह मंदिर से गणपति की पाषाण मूर्ति चोरी हुई।
- वर्ष 2022: बिहार के पटना जिले के एक गांव से भगवान विष्णु की मूर्ति चोरी हुई। (इन दोनों मूर्तियों की बरामदगी अभी तक नहीं हो सकी है।)
सुरक्षा और सुरक्षात्मक उपाय
संस्कृति मंत्री ने बताया कि पुरावशेषों की चोरी रोकने के लिए राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थलों और संग्रहालयों में नियमित सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ निजी सुरक्षा गार्ड और सीआईएसएफ (CISF) तैनात किए गए हैं।
चोरी रोकने की प्रक्रिया
चोरी की सूचना मिलने पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है। इसके साथ ही सीमा शुल्क (कस्टम्स) सहित सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लुक आउट नोटिस जारी किया जाता है, ताकि चोरी हुई वस्तुओं की तस्करी और अवैध निर्यात को रोका जा सके।
