भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने शनिवार को पटना में कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) में आयोजित ओपन हाउस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने छात्रों से सीधे संवाद किया। इस अवसर पर पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और कुलपति फैजान मुस्तफा मौजूद रहे।
पटना: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने शनिवार को पटना स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) में छात्रों के साथ ‘ओपन हाउस’ संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका विभिन्न मुद्दों पर छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के ‘मौलिक अधिकार’ की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सीजेआई का रुख कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने दिल्ली और पटना सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस की कड़ाई को लेकर सवाल पूछा। इसका जवाब देते हुए सीजेआई सूर्या कांत ने कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस टिप्पणी पर सभागार में मौजूद छात्रों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया, जबकि कुलपति फैजान मुस्तफा ने कहा कि संदेश साफ है कि छात्रों के मामलों में अदालतें अनदेखी नहीं करेंगी।
कानून की पढ़ाई में बदलाव के प्रस्ताव पर रुचि सीजेआई सूर्या कांत ने पांच वर्षीय कानून डिग्री पाठ्यक्रम को चार साल की पढ़ाई और एक साल की अनिवार्य अदालत अप्रेंटिसशिप (कोर्ट इंटर्नशिप) में बदलने के प्रस्ताव में भी रुचि दिखाई।
छात्रों के साथ ऐतिहासिक सीधा संवाद यह पहला मौका था जब किसी वर्तमान सीजेआई ने कानून के छात्रों के साथ इस तरह के ओपन हाउस संवाद में भाग लिया। सीजेआई ने सभागार में मौजूद छात्रों के सवालों के सीधे जवाब दिए। यह संवाद हाल ही में हैदराबाद के नालसार (NALSAR) और बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के उनके प्रस्तावित दौरों के विरोध की पृष्ठभूमि में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
