नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। इससे भारत के तेल आयात बिल पर भारी बोझ पड़ने के साथ-साथ रुपये के मूल्य और देश में महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
पश्चिम एशिया में जारी गंभीर तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का वायदा भाव दो प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत भी लगभग तीन प्रतिशत की तेजी के साथ 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है।
भारत के तेल आयात बिल पर बढ़ेगा सीधा बोझ
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। वैश्विक स्तर पर कीमतों में इस तेज उछाल के कारण देश के आयात बिल में भारी बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) पर पड़ेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ेगा।
रुपये और खुदरा महंगाई पर असर की आशंका
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था के कई पहलुओं पर दिख सकता है। आयात लागत बढ़ने से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है। इसके अलावा, परिवहन और ईंधन लागत बढ़ने से देश में आम उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे खुदरा महंगाई दर पर दबाव और बढ़ जाएगा।
