नई दिल्ली में शुक्रवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राष्ट्रपति भवन की ओर विरोध मार्च निकाला। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी नेता रात 8 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले। सुरक्षा के मद्देनजर नई दिल्ली इलाके में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं।
संविधान सदन में रणनीति बैठक के बाद राष्ट्रपति भवन के लिए निकले विपक्षी सांसद
नई दिल्ली के संविधान सदन स्थित सेंट्रल हॉल में शुक्रवार को इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं और सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कथित “वोट चोरी” के खिलाफ अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के बाद शाम को विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। विपक्ष मतदाता सूची संशोधन में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और नई दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त
संविधान सदन में आयोजित इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शामिल हुए। इनके अलावा तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले, आईयूएमएल के ई.टी. मोहम्मद बशीर, सीपीएम के एम.ए. बेबी, सीपीआई के डी. राजा, समाजवादी पार्टी के राजीव राय व मोहिबुल्लाह नदवी, तथा निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल और पप्पू यादव सहित अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया।
विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए प्रशासन ने नई दिल्ली के 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं। इसके अलावा दिल्ली में 9 और 10 अक्टूबर को खुदरा शराब की दुकानें बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो और परिवहन प्रतिबंधों पर दिए निर्देश
दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार को परिवहन प्रतिबंधों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं होना चाहिए और सेवाओं को नियंत्रित तरीके से संचालित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा कि मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद होने से गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य हिस्सों से आने-जाने वाले छात्रों, कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आम जनता की असुविधा को रोकने के लिए अपने फैसलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति रद्द, ट्रेनें भी प्रभावित
सीपीएम महासचिव एम.ए. बेबी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में मेट्रो बंद करने, ट्रेनें रद्द करने, इंटरनेट पर रोक और होटल बुकिंग पर कथित प्रतिबंधों को चुनौती दी। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिसके लिए कम समय का नोटिस देने और पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया है।
यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को देखते हुए दिल्ली में शुक्रवार रात 9 बजे से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा, शनिवार सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों के आसपास निर्धारित कई मेल, एक्सप्रेस, मेमू (MEMU) और ईएमयू (EMU) ट्रेनों को भी रद्द कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जंतर-मंतर के विकल्प के रूप में किसी अन्य विरोध स्थल की पहचान करने पर भी विचार करने को कहा है।
