नई दिल्ली में शुक्रवार को शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने नीट यूजी (NEET UG) पेपर लीक मामले पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की संसद के प्रति जवाबदेही तय करने के लिए एक विधायी तंत्र बनाने की सिफारिश की है।
संसदीय समिति ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, विधायी तंत्र बनाने की सिफारिश
नई दिल्ली में शुक्रवार को जारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में संसदीय समिति ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर विश्वास बनाए रखना सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता का विषय है। समिति ने सुझाव दिया कि शिक्षा विभाग को एक ऐसा संसदीय ढांचा पेश करना चाहिए, जो एनटीए की संसद के दोनों सदनों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करे।
3 मई को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद एनटीए ने 12 मई को इसे रद्द कर दिया था। समिति ने टिप्पणी की कि परीक्षा का रद्द होना यह दर्शाता है कि एजेंसी के कामकाज में और अधिक सुधार की आवश्यकता है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा और सरकारी केंद्रों को प्राथमिकता देने का सुझाव
संसदीय पैनल ने परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की वकालत करते हुए पेन-एंड-पेपर मॉडल के बजाय कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मॉडल अपनाने की सिफारिश की है। इसके अलावा, प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए निजी केंद्रों पर निर्भरता कम करने और सरकार के स्वामित्व वाले केंद्रों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
समिति का मानना है कि संगठित नेटवर्क जो परीक्षा धोखाधड़ी से मुनाफा कमाते हैं, वे हमेशा कमजोर कड़ियों की तलाश करते हैं। इससे निपटने के लिए एनटीए को पर्याप्त कर्मचारी, मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और संचालन के डिजिटलीकरण की आवश्यकता है।
क्वेश्चन बैंक के विस्तार और देर से आने वाले छात्रों के लिए सिफारिशें
पेपर लीक से सुरक्षा के लिए समिति ने बड़े, विविध और लगातार अपडेट होने वाले क्वेश्चन बैंक में निवेश करने का सुझाव दिया है। पैनल के अनुसार, हर साल नए प्रश्न पत्र सेट करने या बार-बार एक ही सेट का उपयोग करने से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को खतरा हो सकता है।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि परीक्षा केंद्रों पर देर से पहुंचने वाले छात्रों को एक अंडरटेकिंग दर्ज करने के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जानी चाहिए।
