प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा में लौह अयस्क के कथित गैर-कानूनी खनन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए साल्गाओकर ग्रुप एंड असोसिएट्स (AVS ग्रुप) की 1,023 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। रविवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में सिंगापुर में मौजूद संपत्तियां भी शामिल हैं।
गोवा लौह अयस्क खनन मामला: प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई, विदेश तक फैली संपत्ति कुर्क
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा में लौह अयस्क के कथित गैर-कानूनी खनन और उससे जुड़े धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले से जुड़े व्यावसायिक समूह की 1,023 करोड़ रुपये से अधिक की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। विशेष बात यह है कि कुर्क की गई इन संपत्तियों में सिंगापुर में स्थित विदेशी संपत्तियां भी शामिल हैं।
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई साल्गाओकर ग्रुप एंड असोसिएट्स (एवीएस ग्रुप) के खिलाफ की गई है। ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि एवीएस ग्रुप द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए अवैध लौह अयस्क खनन के मामले में धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 19 जून को संपत्ति जब्ती का एक अस्थायी आदेश जारी किया गया था।
5 वर्षों में अवैध खनन से कमाया 2492.95 करोड़ का मुनाफा
जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए इनपुट्स और दस्तावेजों के मुताबिक, साल्गाओकर ग्रुप एंड असोसिएट्स (एवीएस ग्रुप) ने साल 2007 से लेकर साल 2012 के मध्य कुल 10 माइनिंग लीज (खनन पट्टे) का संचालन किया था। इन 5 वर्षों की अवधि के दौरान समूह द्वारा नियमों को ताक पर रखकर गैर-कानूनी तरीके से भारी मात्रा में लौह अयस्क निकाला गया। इस अवैध अयस्क का अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात कर लगभग 2,492.95 करोड़ रुपये का मोटा मुनाफा कमाया गया।
ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और शेल कंपनियों का नेटवर्क
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में इस अवैध कमाई को विदेशी धरती पर खपाने के एक बड़े नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है। अवैध रूप से निकाले गए इस लौह अयस्क को पहले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में स्थापित कुछ शेल (फर्जी) कंपनियों को जानबूझकर बेहद कम दाम पर बेचा गया था। कागजों पर कम दाम दिखाने के बाद, इन शेल कंपनियों ने आगे इसी अयस्क को ऊंचे दामों पर बेचकर विदेशों में लगभग 2,744.89 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटाई।
केंद्रीय एजेंसियों के आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, इन 5 वर्षों के दौरान माइनिंग लीज के जरिए किए गए मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध अंतरराष्ट्रीय सौदों का कुल वित्तीय हिसाब-किताब 5,237.84 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी वित्तीय हेराफेरी के आधार पर अब ईडी ने समूह की घरेलू और सिंगापुर स्थित 1,023 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियों को कुर्क कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
